संताली - हिन्दी व्याकरण
संताली ग्रामर : वाक्य तथा उसके भाग
शब्दों के ऐसे समूह को, जो एक निश्चित ढंग से क्रमबद्ध हो तथा पूर्ण अर्थ देता हो , उसे संताली में ayat कहा जाता है ।
इन वाक्यों को पढ़ें -
- Uni do̱e ińren ho̱po̱nkana (Ińren ho̱po̱nkanae).-वह मेरा बेटा है ।
- Khe̱tko siok̕kana (Onko do̱ khe̱tko siok̕kana).-वे खेत जोत रहा हैं ।
- Uni do̱e Mạńji Babakana (Mạńjhi Babakanae)-वह प्रधान है ।
- Uni do̱e ḍakṭor kana (Ḍakto̱rkanae). -वह चिकित्सक है ।
ऊपर प्रत्येक पंक्ति में शब्दों के समूह हैं । ये शब्द एक निश्चित क्रम में रखे गये हैं तथा इनमें पूर्ण अर्थ निकलता है । इसे ayat कहते हैं ।
Ayat Hạṭiń (वाक्य के भाग)
वाक्य के दो भाग होते हैं -
1.Subject {Kạmiạ (उद्देश्य/कर्ता )}
2. predicate {Lạlạiak̕ (विधेय)}
इन वाक्यों को पढ़ें -
A B
Kạmiạ {Subject (उद्देश्य) } Lạlạiak̕ {Predicate (विधेय)}
- Uni do̱e ińren ho̱po̱nkana.
- Onko do̱ khe̱tko siok̕kana.
- Uni do̱e Mạńji Babakanakana
उद्देश्य और विधेय के बारे में यहाँ बताया जा रहा है :
Kạmiạ {Subject (उद्देश्य)}:
उद्देश्य यानी कर्ता किसी वाक्य का वह हिस्सा होता है जो वाक्य में बताया गए कार्य को करने वाला होता है ,या जिसके बारे में कुछ कहा जाता है । सरल शब्दों में , विषय वह होता है जो क्रिया (verb) से जुड़ा होता है और जिसे क्रिया के माध्यम से संदर्भित किया जाता है ।
संताली में विषय का विवरण :
वाक्य में "विषय" वह होता है जिसके बारे में वाक्य में कुछ कहा जाता है । यह अक्सर कर्ता (doer) होता है ,यानी वह जो क्रिया कर रहा होता है । उदाहरण के लिए , जब हम कहते हैं "Lo̱kho̱ne siet̕kana." , तो यहाँ "Lo̱kho̱n" वाक्य का विषय है , क्योंकि ''Lo̱kho̱n'' वह व्यक्ति है जो ''siet̕kana (जोत रहा है) '' ।
विषय के प्रकार :
संताली में विषय तीन प्रकार के होते हैं :
1. Bẹkạmi Kạmiạn Kạmiạ{कर्तृवाच्य विषय (Active Subject)}:
- यह वह होता है जो स्वयं क्रिया करता है । इसे कर्ता भी कहा जाता है ।
उदाहरण :
- Lukhiye sereńe̱t̕kana.
- इसमें ''Lukhi'' कर्ता है और वाक्य का विषय है, क्योंकि वह क्रिया (sereń-गाना) कर रही है ।
2.Bẹkạmi Kạmiạn Kạmiạ {कर्मवाच्य विषय (Passive Subject)} :
जब वाक्य कर्मवाच्य होता है , तो विषय वह होता है जिस पर क्रिया की जाती है ।
उदाहरण :
- '' sereń do̱ Lukhi ho̱te̱te̱ sereńok̕ kana.''-गीत लुखी द्वारा गाया जाता है ।
- यहाँ ''sereń-गीत'' वाक्य का विषय है , क्योंकि क्रिया (गाया जाता है) ''sereń-गीत'' पर हो रही है , भले ही कार्यकर्ता ''Lukhi'' है ।
नोट : संताली भाषा में कर्मवाच्य दो हैं:
1.Bẹkạmi Kạmiạn Kạmiạ{कर्मवाच्य (Passiv voice)}-इसका पहचान oco है ।
2.Tala Bẹkạmi Kạmiạn Kạmiạ{मध्य कर्मवाच्य (Middle and passive voice)}-इसका पहचान ok̕/o̱k̕ /ogok̕/o̱go̱k̕/k̕ है ।
Ayat (वाक्य) में विषय की पहचान :
विषय को पहचानने का आसान तरीका यह है कि आप वाक्य में ''o̱ko̱e-कौन '' या ''ce̱t̕-क्या '' से प्रश्न पूछें ,और जो उत्तर मिले , वही विषय होगा ।
उदाहरण :
- '' Lukhi do̱ dakae jo̱mkeda.''-लुखी ने खाना खाया ।
- सवाल : कौन खाना खाया ?
- उत्तर: Lukhi (विषय) ।- कर्तृवाच्य के मामले में ।
- सवाल : क्या खाया :
- उत्तर : ''daka''(विषय) । - कर्मवाच्य के मामले में ।
- ''Pusi toae cato̱k̕ada.'' -बिल्ली ने दूध चाटा ।
- सवाल : कौन चाटा ?
- उत्तर : Pusi (विषय)
- सवाल : क्या चाटा ?
- उत्तर : दूध (विषय) ।
Kạmiạ {विषय(उद्देश्य)} और Lạlạiak̕ {विधेय का संबंध }:
उद्देश्य और विधेय मिलकर वाक्य को पूरा करते करते हैं । वाक्य का उद्देश्य वह होता है जिसके बारे में कुछ कहा जा रहा है ,जबकि विधेय उस विषय के बारे में जानकारी देता है ।
उद्दाहरण :
- वाक्य : Lukhi gaḍa kho̱c̕ dak̕e lo ạguet̕kana.
- विषय : ''Lukhi''
- विधेय : ''gaḍa kho̱c̕ dak̕e lo ạguet̕kana.''
Kạmiạ (विषय) के अन्य रूप :
1. Sadharo̱n Kạmiạ {सरल विषय (simple subject)}:
यह केवल एक शब्द का होता है जो मुख्य रूप से क्रिया करता है ।
उद्दाहरण :
- ''Gidrạko gatek̕ kana.''-बच्चे खेल रहे हैं ।
- यहाँ ''gidrạ'' सरल विषय है ।
2. Lạṭu Kạmiạ {विस्तृत विषय (compound subject)}: इसमें एक से अधिक शब्द हो सकते हैं ,जो एक साथ मिलकर क्रिया करते हैं ।
उदाहरण :
- ''Lo̱kho̱n ar Co̱ro̱ntạkin kạmikana''
- यहाँ ''Lo̱kho̱n ar Co̱ro̱n'' विस्तृत विषय हैं ।
निष्कर्ष:
विषय (उद्देश्य) वाक्य का मुख्य हिस्सा होता है , जो यह दर्शाता है कि वाक्य में क्रिया कौन कर रहा है या किसके बारे में कुछ कहा जा रहा है । यह वाक्य की केन्द्रीय इकाई है ,जिसके बिना वाक्य अपूर्ण होता है ।
Lạlạiak̕ {predicate (विधेय)}:
विधेय(Predicate) एक व्याकरणिक शब्द है ,जो किसी वाक्य के उस हिस्से को दर्शाता जो विषय या उद्देश्य(subject) के बारे में कुछ बताता है । यह विषय (subject) द्वारा किए कार्य या स्थिति का वर्णन करता है । वाक्य का मुख्य उद्देश्य होता है कि वह किसी विषय (subject) के बारे में जानकारी प्रदान करे और यह जानकारी प्रदान करने का काम विधेय करता है ।
संताली में विधेय का विवरण :
विधेय वह भाग होता है जो वाक्य के विषय के बारे में कुछ बताता है । यह अक्सर क्रिया (verb) और उसके साथ आने वाले अन्य शब्दों को मिलकर बनता है । वाक्य में , विधेय के बिना कोई भी विचार या संदेश पूर्ण नहीं हो सकता ।
उदाहरण :
- '' Co̱rone gatek̕kana.'' - चरण खेल रहा है ।
- इसमें ''Co̱ro̱n'' वाक्य का विषय (subject) है और ''gatek̕kana-खेल रहा है '' विधेय है , जो बताता है कि ''Co̱ro̱n'' क्या कर रहा है
- इसमें ''gidrạ'' वाक्य का विषय है और ''ṭạṇḍireko gatek̕kana'' विधेय है , जो विषय के बारे में जानकारी देता है ।
Lạlạiak̕ (विधेय) के घटक :
विधेय में आमतौर पर निम्नलिखित भाग शामिल होते हियाँ :
1. Kạjnum क्रिया (verb) : जो मुख्य क्रिया बताता है कि विषय क्या कर रहा है ।
- जैसे : gatek̕kana,kạmikana.
2.Lạlạiak̕ विधेय की पूरक (complement) : कभी - कभी विधेय में विषय के कार्य को और स्पष्ट करने के लिए अन्य शब्द भी आते हैं ।
जैसे :
- स्थान ,समय आदि ।
1.Sadharo̱n Lạlạik̕ {सरल विधेय (simple predicate)}: इसमें केवल क्रिया होती है ।
उदाहरण :
- ''Lo̱kho̱ne paṛhaok̕kana.'' लक्ष्मण पढ़ता है ।
- यहाँ ''paṛhaok̕kana'' विधेय है ।
2.Lạṭu Lạlạik̕ {विस्तृत विधेय (compound predicate)} : इसमें क्रिया के अलावा और भी अन्य शब्द होते हैं ,जैसे :संज्ञा ,सर्वनाम , क्रियाविशेषण ,पूरक आदि ,जो क्रिया के बारे में अतिरिक्त जानकारी देते हैं ।
उदाहरण :
- ''Ram setak̕re siok̕e jorạoeda.''
- यहाँ ''setak̕re siok̕e jorạoeda'' विस्तृत विधेय है ।
संक्षेप में, विधेय वाक्य के विषय के बारे में कुछ जानकारीप्रदान करने वाला भाग होता है ,जो वाक्य को पूर्ण और अर्थपूर्ण बनाता है ।
Kuṛai {कर्म (Object) }:
कर्म (Object) वाक्य का वह हिस्सा होता है जिस पर क्रिया (verb) का प्रभाव या कार्य होता है । सरल शब्दों में , कर्म वह होता है जो क्रिया से प्रभावित होता है या जिस पर क्रिया की जाती है । यह वाक्य के उस विषय से जुड़ा होता है जो क्रिया को अंजाम दे रहा है । 'Kuṛai ''' को हिन्दी में कर्म और अंग्रेजी में इसे ''Object)'' कहते हैं ।
संताली में कर्म का विवरण :
जब वाक्य में किसी क्रिया का परिणाम किसी व्यक्ति , वस्तु या स्थान ,पर पड़ता है , तो उसे कर्म कहा जाता है । कर्म क्रिया का वह भाग होता है जो क्रिया का उद्देश्य होता है , यानी क्रिया किसके ऊपर या किसके लिए की जा रही है ।
Kuṛai (कर्म) के प्रकार :
संताली में मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं :
1. So̱do̱r Kuṛai {सीधा कर्म (Direct object या सक्रिय कर्म )}:
यह वह कर्म होता है जो सीधे क्रिया से प्रभावित होता है । यह क्रिया का मुख्य लक्ष्य होता है ।
उदाहरण :
- ''Ram dakae jo̱mket̕a-राम ने खाना खाया । ''
- यहाँ ''daka-खाना'' सीधा कर्म है , क्योंकि खाए जाने की क्रिया सेव पर की गई ।
2. O̱ko Kuṛai {अप्रत्यक्ष कर्म (Indirect Object)}:
यह वह होता है जिसे सीधे क्रिया का परिणाम नहीं मिलता ,लेकिन क्रिया का उद्देश्य या लाभार्थी होता है ।
उदाहरण :
- ''Lukhi do̱ gidrạ dakae emat̕koa-लुखी बच्चों को खाना दिया ।''
- यहाँ ''gidṛạ'' अप्रत्यक्ष कर्म है , क्योंकि उसे ''daka'' दिया गया है , जबकि daka कर्म है , क्योंकि दिया जाना daka पर हो रहा है ।
Kuṛai (कर्म) की पहचान :
कर्म की पहचान के लिए आप वाक्य में ''ce̱t̕-क्या'' या ''o̱ko̱e-कौन'' जैसे प्रश्न से कर सकते हैं ।
उदाहरण :
- ''Lukhi do̱ gidrạ dakae emat̕koa.''
- सवाल :Lukhi Ce̱t̕e emat̕koa?
- जबाब : daka.( यहाँ ''daka'' सीधा आर्म है)
- सवाल :O̱ko̱eye emat̕koa?
- जबाब : gidrạ. ( ''यहाँ gidrạ'' अप्रत्यक्ष कर्म है )
कर्म के उदाहरण :
So̱do̱r Kurại (सीधा कर्म/प्रत्यक्ष कर्म) :
- "Ram puthie paṛhaoket̕a."
- सवाल : Ram ce̱t̕e paṛhaoket̕a?
- जबाब :Puthi.(यहाँ "puthi"सीधा कर्म है , क्योंकि "paṛhao" क्रिया "puthi" पर की जा रही है । )
Oko Kurại (अप्रत्यक्ष कर्म)
- "Mahasoe gidrạko kạhnie ańjo̱mat̕koa "
- सवाल: Mahasoe kạhni किसको सुनाई ?
- जबाब : "gidrạko."
- ( यहाँ "gidrạko" अप्रत्यक्ष कर्म है, क्योंकि क्रिया "ańjo̱m" बच्चों के लिए की गई है । )
- सवाल: क्या सुनाई ?
- जबाब: ''kạhni''( यहाँ ''kạhni'' सीधा कर्म है ) ।
Kuṛai ar Eṭak̕ Beako̱ro̱n Hạṭiń (कर्म और अन्य व्याकरणिक भाग) :
Ayat के मुख्यत: तीन घटक होते हैं :
1.Kạmiạ{विषय (उद्देश्य- subject)}:-यह वह जो क्रिया कर रहा है ।
2. Lạlạik̕ { विधेय (predicate)}:- यह वह जो विषय के बारे में जानकारी देता है ।
3.Kuṛai {कर्म (object} : यह वह जिस पर क्रिया का असर होता है ।
अन्य उदाहरण (Eṭak̕ Pạrtul) :
"Lukhi do̱ gidrạko dakae emat̕koa."
- विषय : "Lukhi"( "Lukhi" वह है जो कार्य कर रही है ) ।
- क्रिया : "emat̕koa"("emat̕koa" यह कार्य/क्रिया है ) ।
- सीधा कर्म : "daka" ( "daka" यह जो दी गई ) ।
- अप्रत्यक्ष कर्म : ''gidrạ'' (''gidrạ''जिसे दी गई ) ।
- Ram do̱ siok̕e calak̕kana.
- Santal Pargana mit̕ṭen SPT act ạnanak̕ Promo̱ṇḍolkana.
- Dak̕edae.
2. Kukli Ayat (प्रश्नवाचक वाक्य):
इस वाक्य के माध्यम के कोई प्रश्न जाता है । इसका उद्देश्य किसी जानकारी , विचार या भाव के बारे में पूछना होता है । प्रश्नवाचक वाक्य के अंत में प्रश्न चिन्ह (?) का प्रयोग किया जाता है ।
उदाहरण :
- Okatem calak̕kana ?-कहाँ जा रहे हो ?
- Ce̱t̕ am dakam jo̱mkeda ?-क्या आपने खाना खाए ?
- Noa khe̱t do̱ o̱ko̱eak̕kana ?- यह खेत किसका है ?
3.Hukum Ayat (आदेशात्मक वाक्य) :
इस प्रकार के वाक्य का उद्देश्य आदेश , अनुरोध ,सलाह या निवेदन करना होता है । आदेशात्मक वाक्य में अक्सर संताली में हिदी के 'आप','तुम' ,'तू' के लिए एक मात्र शब्द है,अंग्रेजी के तरह और वह शब्द है 'am' है ।
उदाहरण :
- Beret̕me.-उठो ।
- Dak̕ ạguạńme. पानी ला दो ।
- Alom raga. - मत रो ।
4.Bhabna - rạskạ Ayat -Hahaṛ (विस्मयादिबोधक वाक्य) :
विस्मयादिबोधक वाक्य वह वाक्य होता है जिसमें किसी भाव ,आश्चर्य ,खुशी,दुख ,क्रोध या किसी अन्य तीव्र भावना को व्यक्त किया जाता है । इन वाक्यों में एक खास तरह का उत्साह या भावनात्मक अभिव्यक्ति होती है । विस्मयादिबोधक वाक्य का अंत आमतौर पर विस्मयादिबोधकचिन्ह ( ! ) के साथ होता है । Bhabna - rạskạ Ayat - Hahaṛa को हिन्दी में विस्मयादिबोधक वाक्य और अंग्रेजी में इसे ''Interjection Sentence.'' कहते हैं ।̣
उदाहरण :
- Bah ! ạdi mo̱ńj murtim benaokedea. -वाह ! बहुत अच्छा मूर्ति बनाए हो ।
- Haere ! uni do̱ tise bạṛic̕ena.-हाय ! वह कब देहांत हो गया ।
- Mase ! teheń tinak̕ rabaṅkana ! -आज कितना ठंड है !
- Haere ! tisem he̱c̕ena ? - अरे ! तुम कब आया ?
- इसमें आश्चर्य और प्रशंसा की भावना व्यक्त की जा रही है ।
- ''Bah'' शब्द भाव को और भी अधिक प्रभावशाली बनाता है ।
- अंत में विस्मयादिबोधक चिन्ह ( ! ) से भावना की तीव्रता को दर्शाया गया है ।
''Haere ! uni do̱ tise bạṛic̕ena.''
- इस वाक्य में आश्चर्य की भावना व्यक्त की गई है कि व्यक्ति की देहांत हो गई ।
- ''Haere'' शब्द से व्यक्ति की मृत्यु की स्थिति और विस्मय प्रकट हो रहा है ।
''Mase ! teheń tinak̕ rabaṅkana.''
- इस वाक्य में आश्चर्य और असुविधा की भावना व्यक्त की गई है कि मौसम बहुत ठंडा है ।
- ''tinak̕'' शब्द ठंड की तीव्रता को दर्शा रहा है ।
- इस वाक्य में आश्चर्य की भावना व्यक्त की गई कि व्यक्ति अचानक सामने आ गया ।
- ''Haere'' शब्द से अचानक की स्थिति प्रकट हो रही है ।
- यह वाक्य किसी तीव्र भावना या अचानक प्रतिक्रिया को दर्शाता है ।
- ऐसे वाक्य के संत में विस्मयादिबोधक चिन्ह ( ! ) का प्रयोग किया जाता है ।
- इन वाक्य में जो भाव व्यक्त होता है , वह अधिक शक्तिशाली और तीव्र होता है ।
- वाक्य संक्षिप्त या विस्तृत हो सकते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य हमेशा भावना को जोदार तरीके से व्यक्त करना होता है ।
इस प्रकार के वाक्य में दो या अधिक स्वतंत्र उपवाक्यों को संयोजक शब्दों , जैसे : 'ar','menkhan ' ,'se' से जोड़कर बनाया जाता है । प्रत्येक उपवाक्य स्वतंत्र रूप से अपना अर्थ व्यक्त करता है । ''Joṛao Ayat'' को हिन्दी में संयुक्त वाक्य और अंग्रेजी में इसे ''compound sentence'' कहते हैं ।
उदाहरण :
- Ram do̱e siok̕kana ar Lukhi do̱ gạchiy tot̕et̕kana.-राम खेत जोत रहा है और लुखी बिचन उखाड़ रही है ।
- Mit̕ dhao Rame phelena, me̱nkhan dosar dho̱e do̱e pasengea.-एक बार राम अनुत्तीर्ण हुआ ,लेकिन दूसरी बार उत्तीर्ण हो ही गया ।
- chaAmem si daṛeak̕a se̱m ãṛgo̱m darẹak̕a .-आप जोत सकते हो या पाटा चला सकते हो ।
- Dakam jo̱ma se̱ piṭhạ - आप भात खाइएगा या रोटी ।
6. Mesal Ayat (मिश्र वाक्य) :
इस प्रकार के वाक्य में एक मुख्य उपवाक्य और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य होते हैं । उपवाक्य स्वतंत्र रूप से अर्थपूर्ण नहीं होते और उन्हें मुख्य उपवाक्य की आवश्यकता होती है । इस प्रकार के वाक्य में अक्सर संबंधबोधक शब्द जैसे : o̱kọe do̱,oka do,tinre, tobe,e̱ṇḍe̱khan,judi,cedak̕je.
''Mesal Ayat' को हिन्दी में मिश्र वाक्य और अंग्रेजी में इसे ''complex sentence'' कहते हैं ।
उदाहरण :
''Tinre ińiń calaoena, tobey dak̕et̕kan tahẽ̱kana.-जब मैं गया ,तो बारिश हो रहा था ।''- Aso̱l Huḍiń Ayat (मुख्य उपवाक्य) : ''tobey dak̕et̕kan tahẽ̱kana'' .(यह स्वतंत्र रूप से अपना अर्थ व्यक्त करता है )
- Ṭehaḍ Huḍiń Ayat (आश्रित उपवाक्य) :''Tinre ińiń calaoena'' (यह वाक्य अकेले स्पष्ट नहीं होता , इसे मुख्य उपवाक्य की जरूरत है । )
- दोनों उपवाक्य को जोड़ने के लिए ''tinre'' और ''tobe''प्रयोग किया गया है
- Aso̱l Huḍiń Ayat (मुख्य उपवाक्य) :
- Ṭehaḍ Huḍiń Ayat (आश्रित उपवाक्य ):
- दोनों उपवाक्य को जोड़ने के लिए ''o̱ko̱e'' का प्रयोग किया गया है
- Aso̱l Huḍiń Ayat (मुख्य उपवाक्य) : ''paskok̕a hutic̕.''
- Ṭehaḍ Huḍiń Ayat (आश्रित उपवाक्य) : ''Judi amem mihnạt lekhac̕ honaṅem.''
- दोनों उपवाक्य को जोड़ने के लिए ''Judi'' का प्रयोग किया गया है
Mesal Ayat (मिश्र वाक्य की विशेषताएं ):
- इसमें एक मुख्य उपवाक्य होता है जो स्वतंत्र रूप से अपना अर्थ स्पष्ट करता है ।
- इसमें एक या अधिक आश्रित उपवाक्य होते हैं जो मुख्य उपवाक्य पर निर्भर होते हैं ।
- आश्रित उपवाक्य अकेले कोई पूर्ण अर्थ नहीं देता , इसे समझने के लिए मुख्य उपवाक्य की जरूरत होती है ।
- इन वाक्यों में संबंधबोधक शब्द या उपसर्ग (जैसे : o̱kọe do̱,oka do,tinre, tobe,e̱ṇḍe̱khan,judi,cedak̕je,okare) प्रयोग किया गया है ।
Sadharo̱n ayat (सरल वाक्य) :
यह एक ऐसा वाक्य होता है जिसमें केवल एक मुख्य उपवाक्य होता है । इसमें एक ही मुख्य क्रिया होती है और एक ही विचार व्यक्त किया जाता है ।
''Sadharo̱n ayat'' को हिन्दी में सरल वाक्य और अंग्रेजी में इसे ''Simple Sentence'' कहते हैं ।
उदाहरण :
- Ram dakae jo̱me̱t̕a.-राम खाता है ।
- Uni puthie paṛhaok̕kana.-वह किताब पढ़ता है ।
- Uni khetre hoṛoe rok̕ho̱ekana.-वह खेत में धान रोपती है ।
Jo̱s katha (निष्कर्ष) :
वाक्य एक भाषा की मूल इकाई होती है , जिसके माध्यम से हम अपने विचार ,भावनाएं , इच्छाएं , और क्रियाएं व्यक्त करते हैं । वाक्य विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं , जैसे : विवरणात्मक ,प्रश्नवाचक , आदेशात्मक ,विस्मयाधिबोधक आदि । प्रत्येक प्रकार का वाक्य एक विशिष्ट उद्देश्य पूरा करता है , जिससे भाषा का उपयोग सरल और प्रभावी हो जाता है ।
Worked out ( हल किया हुआ उदाहरण ) :
1. इनमें से प्रत्येक वाक्य के बारे में बताएं कि वह किस तरह का वाक्य है :-
- Ce̱t̕ amem aṅgo̱ce̱t̕kangea ?- Kukli
- Lo̱khon do̱e paṛhaok̕kana. - Mela ayat
- Ce̱t̕ am gapam calak̕gea ?-Kukli
- Do calak̕me.-Hukum
- Dayakate go̱ṛo̱ạńme.-Hukum
- Haere ! tinạk̕ mõ̱ńj baha.-Bhabna - rạskạ Ayat-Hahaṛa
- Auriń sạtạk̕a.-Mela ayat
- Celeama ?-Kukli
- Hạṇḍi alom ńuia.-Hukum
- Chitạ do̱e kuṛi ho̱po̱nkana.-Mela ayat
- Cet̕ amdo̱m dakṭo̱rkana?- Kukli
- Ce̱t̕ noa do̱ sonakana se̱ baṅ ?- Kukli
- haere ! tinạk̕ usulae nui do̱ .-Bhabna - rạskạ Ayat-Hahaṛa
- Aema bo̱cho̱rem jivedok̕ ma baṛe̱ !-Hukum
- Mit̕ tharre teṅgok̕pe.-Hukum
- Uni do̱ bae koṅkawa.-Mela ayat
- Ko̱lo̱m sabme ar iskul calak̕me.
- Noa tale dọ̱ usulgea.
- Uni do̱e kulkana.
- Noa do Jaher Thankana.
- Haere! ạḍi mo̱ńj sạṛitae.
- Ce̱t̕ am gapam hijuk̕a
- Dayakate go̱ṛo̱aeme.
- Is !jạnumiń ro̱k̕ena.
- Ram ar Chitạtạkinkin baplaeyena.
- Tinre ińiń calak̕a, tobem daka jo̱m oṛk̕em hijuk̕a.
- O̱ko̱ṭak̕ koṛa pạńcji deṅgawakat̕, uni doe iń dadakana.
- Piprạ ato do̱ .......menak̕a?
- Sam Pargana do̱ ..........e tahẽ̱kana?
- Rãci reak̕ Rajdhani reak̕ ńutum do̱.........kana?
- Tilkạ Mạńjhiak̕ jo̱nom mãhã do̱ .........kana?
- ........m clak̕a?
- .........m kạmia?
- .........m calak̕a?
- ........pe kạmia?
- Lukhi hoṛoe ro̱k̕ho̱ekana.
- Ińren gidrạko do̱ iń soṅge o̱ṛak̕re menak̕ko̱.
- Amren ḍaṅrakin do̱ khe̱tre bạnuk̕kinạ.
- Mańjhi do̱e besgea.
- Bar pại caoley kirińkeda.
- Hul Mãhã do̱ 30 jun hilok̕ko manaoa.
Ńunum संज्ञा (Noun):
किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु, गुण, अवस्था या भाव का बोध कराने वाले शब्द Ńunum कहलाते हैं, Ńunum को हिन्दी में संज्ञा और अंग्रेजी में Noun कहते हैं ।। जैसे: Ram, Lo̱kho̱n, Hoṛo, Dumkạ,Pạrịṛdaha, Rạskạ, Haso,आदि।
Ujnum सर्वनाम (Pronoun):
जो संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाते हैं, वे Ujnumकहलाते हैं। Ujnum को हिन्दी में सर्वनाम और अंग्रेजी में Pronoun कहते हैं । जैसे: Uni, Nui,Noa,Hana,Nhãwã,Hanḍẹ,Nhaṇḍe̱,Hạni,Nhại,Hạni,Nhạko Iń,Am, आदि।
Gunum विशेषण (Adjective):
जो शब्द Ńunum या Ujnum की विशेषता बताते हैं, उन्हें Gunum कहते हैं। Ńunum को हिन्दी में संज्ञा और अंग्रेजी में Noun कहते हैं । जैसे: He̱nde̱,Poṇḍ,Arak̕, Lạtu, Kạṭic̕,Jeleń, Osar,Khaṭo,Usul,Phe̱ḍ, E̱se̱l,Tels ãw̃ãr आदि।
Kạjnum क्रिया (Verb):
जो शब्द किसी कार्य के होने या करने का बोध कराते हैं, उन्हें Kạjnum कहते हैं। Kạjnum को हिन्दी में क्रिया और अंग्रेजी में Verb कहते हैं । जैसे: Jo̱m, Ńu, Dạr, O̱l, Paṛhao, Gitic̕, आदि।
Kạjnum-Gunum क्रिया-विशेषण (Adverb):
जो शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं, उन्हें Kạjnum-Gunum कहते हैं। Kạjnum-Gunum को हिन्दी में क्रिया-विशेषण और अंग्रेजी में Adverb कहते हैं । जैसे: Ạḍi, Bại-bại .Gapa, Beṛhaete, Kudạm se̱c̕re,Haṇḍe̱,No̱ṉḍe̱,Nhaṇḍe̱,Nho̱ṇḍe̱ , आदि।
Jok̕raowak̕ संयोजक (Conjunction):
जो शब्द दो या दो से अधिक शब्दों, वाक्यों या वाक्यांशों को जोड़ने का काम करते हैं, उन्हें Jok̕raowak̕ कहते हैं । Jok̕raowak̕ को हिन्दी में संयोजक और अंग्रेजी में Conjunction कहते हैं । जैसे: Ar, Ar baṅ khan ,Me̱nkhan ,S̱e̱ आदि।
Haharạ-Rạskạ-Bhabna विस्मयादिबोधक (Interjection):
जो शब्द अचानक उत्पन्न हुई भावनाओं को व्यक्त करते हैं, उन्हें Haharạ-Rạskạ-Bhabna कहते हैं। Haharạ-Rạskạ-Bhabna को हिन्दी में विस्मयादिबोधक और अंग्रेजी में Interjection कहते हैं । जैसे:Haere !, Is !, Aego !,Bah̕ bah̕ !,Ọh̕ ọh̕ !,uh̕ uh̕ !, Ih̕ ih̕ !,Hae hae !, , आदि।
Mucạt̕ Jorạo परसर्ग/प्रत्यय (Postposition/Suffi):
वे शब्द जो Ńunum या Ujnum के पहले आकर उनके साथ अन्य शब्दों का संबंध बताते हैं, उन्हें पूर्वसर्ग Mucạt̕ Jorạo कहते हैं। Mucạt̕ Jorạo को हिन्दी में परसर्ग/प्रत्यय और अंग्रेजी में Postposition/Suffix कहते हैं । जैसे: Lạgit̕ ,re,te, ho̱te̱te ,ren ,ak̕ ,aṅ , reaṅ
ये Sabad Hạṭtiń वाक्य में शब्दों के प्रयोग और उनके अर्थ को स्पष्ट करते हैं।शब्द-भेद
- Cet̕ am gapam calak̕a ? -Kukli
- Gapa do̱ iń Ḍumkạń calak̕a. - Mela ayat
- Haere ! ạdị mo̱ńj sạṛitae. - Hahaṛ-rạskạ-bhabna-duk ayat
- Ko̱lo̱m sabme ar do̱ iskul calak̕me. -Hukum
- Aema bo̱cho̱r jivedo̱k̕me baṛe̱ -Hukum
- Noa dare do̱ ạḍi maraṅa. -Mela ayat
- Tinạk̕ tel sãwãr koṛakanae -Hahaṛ-rạskạ-bhabna-duk ayat
- Noa daka do̱ reaṛgea. -Mela ayat
- Iń lạgit̕em kạmikea ? -Hukum
- Do calak̕me. -Hukum
- Sạt go̱dme. -Hukum
- Is ! jạnumiń ro̱k̕ena -Hahaṛ-rạskạ-bhabna-duk ayat
- Ọh -ọh ! alom laga,laḍu nahãk̕ babae ạguama. -Hahaṛ-rạskạ-bhabna-duk ayat
- Isre ! deań jo̱sena. -Hahaṛ-rạskạ-bhabna-duk ayat
- Do amge bare̱ ̣̣calak̕me. -Hukum
- Dạṛme ar arhọ̃ dạr ruạrme.- -Hukum
- Do daka jo̱mlem. - -Hukum
- Ce̱t̕em cek̕kakana ?--Kukli
- Noa do̱ bạric̕gea.-Mela ayat
4. Do̱ dạṛ dạṛ họe dak̕ he̱c̕ se̱ṭe̱rena.
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