संताली - हिन्दी व्याकरण

संताली ग्रामर : वाक्य तथा उसके भाग

शब्दों के ऐसे समूह को, जो एक निश्चित  ढंग से क्रमबद्ध हो तथा पूर्ण अर्थ देता हो , उसे संताली में ayat कहा जाता है ।

 इन वाक्यों को पढ़ें -

  • Uni do̱e ińren ho̱po̱nkana (Ińren ho̱po̱nkanae).-वह मेरा बेटा है ।
  • Khe̱tko siok̕kana (Onko do̱ khe̱tko siok̕kana).-वे खेत जोत रहा हैं ।
  • Uni do̱e Mạńji Babakana (Mạńjhi Babakanae)-वह प्रधान है ।
  • Uni do̱e ḍakṭor kana (Ḍakto̱rkanae). -वह चिकित्सक है । 

ऊपर प्रत्येक पंक्ति में शब्दों के समूह हैं । ये शब्द एक निश्चित क्रम में रखे गये हैं तथा इनमें पूर्ण अर्थ निकलता है । इसे ayat कहते हैं ।  

Ayat Hạṭiń  (वाक्य के भाग)

वाक्य के दो भाग होते हैं -

1.Subject {Kạmiạ (उद्देश्य/कर्ता )}

2. predicate {Lạlạiak̕ (विधेय)}

इन वाक्यों को पढ़ें -

     A                                                  B

Kạmiạ {Subject (उद्देश्य) }                        Lạlạiak̕ {Predicate (विधेय)}

  • Uni do̱e ińren                        ho̱po̱nkana.
  •  Onko do̱ khe̱tko                    siok̕kana.
  • Uni do̱e                              Mạńji Babakanakana

उद्देश्य और विधेय के बारे में यहाँ बताया जा रहा है :

Kạmiạ {Subject (उद्देश्य)}:

 उद्देश्य यानी कर्ता  किसी वाक्य का वह हिस्सा होता है जो वाक्य में बताया गए कार्य को करने वाला होता है ,या जिसके बारे में कुछ कहा जाता है ।  सरल शब्दों में , विषय वह होता है जो क्रिया (verb)  से जुड़ा होता है और जिसे क्रिया के माध्यम से संदर्भित किया जाता है ।

संताली में  विषय का विवरण : 

वाक्य  में "विषय" वह होता है जिसके बारे में वाक्य में कुछ कहा जाता है । यह अक्सर कर्ता (doer)  होता है ,यानी वह जो क्रिया कर रहा होता है । उदाहरण के लिए , जब हम कहते हैं "Lo̱kho̱ne siet̕kana." , तो यहाँ  "Lo̱kho̱n" वाक्य का विषय है , क्योंकि  ''Lo̱kho̱n''  वह व्यक्ति है जो ''siet̕kana (जोत रहा है) '' ।     

विषय के प्रकार :  

संताली में विषय तीन प्रकार के होते हैं :  

1.  Bẹkạmi Kạmiạn  Kạmiạ{कर्तृवाच्य  विषय (Active Subject)}: 

  • यह वह होता है जो स्वयं क्रिया करता है । इसे कर्ता भी कहा जाता है । 

उदाहरण :

  • Lukhiye sereńe̱t̕kana. 
  • इसमें ''Lukhi'' कर्ता है और वाक्य का विषय है, क्योंकि वह क्रिया (sereń-गाना) कर रही है । 

2.Bẹkạmi Kạmiạn Kạmiạ {कर्मवाच्य विषय (Passive Subject)} :

जब वाक्य कर्मवाच्य होता है , तो विषय वह होता है जिस पर क्रिया की जाती है । 

उदाहरण :

  • '' sereń do̱ Lukhi ho̱te̱te̱ sereńok̕ kana.''-गीत लुखी द्वारा गाया जाता है । 
  • यहाँ  ''sereń-गीत'' वाक्य का विषय है , क्योंकि क्रिया (गाया जाता है) ''sereń-गीत'' पर हो रही है , भले ही कार्यकर्ता ''Lukhi'' है । 

नोट : संताली भाषा में कर्मवाच्य  दो हैं: 

1.Bẹkạmi Kạmiạn Kạmiạ{कर्मवाच्य (Passiv voice)}-इसका पहचान oco है ।

2.Tala Bẹkạmi Kạmiạn Kạmiạ{मध्य कर्मवाच्य (Middle and passive voice)}-इसका पहचान ok̕/o̱k̕ /ogok̕/o̱go̱k̕/k̕ है

 

Ayat (वाक्य) में विषय की पहचान :

विषय को पहचानने का आसान तरीका यह है कि आप वाक्य में  ''o̱ko̱e-कौन '' या ''ce̱t̕-क्या '' से प्रश्न पूछें ,और जो उत्तर मिले , वही विषय होगा । 

उदाहरण : 

  • '' Lukhi do̱ dakae jo̱mkeda.''-लुखी ने खाना खाया । 
  • सवाल : कौन खाना खाया ?
  • उत्तर: Lukhi (विषय) ।-  कर्तृवाच्य के मामले में ।
  •  सवाल : क्या खाया :
  • उत्तर : ''daka''(विषय) । - कर्मवाच्य के मामले में ।
  • ''Pusi toae cato̱k̕ada.'' -बिल्ली ने दूध चाटा । 
  • सवाल : कौन चाटा ?
  • उत्तर : Pusi (विषय)
  • सवाल : क्या चाटा ?
  • उत्तर : दूध (विषय) । 

Kạmiạ {विषय(उद्देश्य)} और Lạlạiak̕ {विधेय का संबंध }:

उद्देश्य और विधेय  मिलकर वाक्य को पूरा करते करते हैं ।  वाक्य का उद्देश्य वह होता है जिसके बारे में कुछ कहा जा रहा है ,जबकि विधेय  उस विषय के बारे में जानकारी देता है । 

उद्दाहरण : 

  • वाक्य : Lukhi gaḍa kho̱c̕  dak̕e lo ạguet̕kana.
  • विषय : ''Lukhi''
  • विधेय : ''gaḍa kho̱c̕  dak̕e lo ạguet̕kana.''

Kạmiạ (विषय) के अन्य रूप :

1. Sadharo̱n  Kạmiạ {सरल विषय (simple subject)}:

यह केवल एक शब्द का होता है जो मुख्य रूप से क्रिया करता है । 

उद्दाहरण : 

  • ''Gidrạko gatek̕ kana.''-बच्चे खेल रहे हैं । 
  • यहाँ  ''gidrạ'' सरल विषय है । 

2. Lạṭu Kạmiạ {विस्तृत विषय (compound subject)}: इसमें एक से अधिक शब्द हो सकते हैं ,जो एक साथ मिलकर क्रिया करते हैं । 

उदाहरण : 

  • ''Lo̱kho̱n ar Co̱ro̱ntạkin kạmikana''
  • यहाँ ''Lo̱kho̱n ar Co̱ro̱n'' विस्तृत विषय हैं ।

निष्कर्ष:

विषय (उद्देश्य) वाक्य का मुख्य हिस्सा होता है , जो यह दर्शाता है कि वाक्य में क्रिया कौन कर रहा है या किसके बारे में कुछ कहा जा रहा है ।  यह वाक्य की केन्द्रीय इकाई है ,जिसके बिना वाक्य अपूर्ण होता है । 


Lạlạiak̕ {predicate (विधेय)}:

 विधेय(Predicate)  एक व्याकरणिक शब्द है ,जो किसी वाक्य के उस हिस्से को दर्शाता जो विषय या उद्देश्य(subject) के बारे में कुछ बताता है । यह विषय (subject) द्वारा किए कार्य या स्थिति का वर्णन करता है । वाक्य का मुख्य उद्देश्य होता है कि वह किसी विषय (subject) के बारे में जानकारी प्रदान करे और यह जानकारी प्रदान करने का काम विधेय करता है । 

संताली में विधेय का विवरण :

विधेय वह भाग होता है जो वाक्य के विषय के बारे में कुछ बताता है । यह अक्सर क्रिया (verb) और उसके साथ आने वाले अन्य शब्दों को मिलकर बनता है । वाक्य में , विधेय के बिना कोई भी विचार या संदेश पूर्ण नहीं हो सकता ।  

उदाहरण :

  •  '' Co̱rone gatek̕kana.'' - चरण खेल रहा है ।  
  • इसमें ''Co̱ro̱n'' वाक्य का विषय (subject) है  और ''gatek̕kana-खेल रहा है '' विधेय है , जो बताता है कि ''Co̱ro̱n'' क्या कर रहा है 
  • इसमें ''gidrạ'' वाक्य का विषय है  और  ''ṭạṇḍireko gatek̕kana'' विधेय है , जो विषय के बारे में जानकारी देता है ।    

Lạlạiak̕ (विधेय) के घटक :  

विधेय  में आमतौर पर निम्नलिखित भाग शामिल होते हियाँ :

1. Kạjnum क्रिया (verb) : जो मुख्य क्रिया बताता है कि विषय क्या कर रहा है ।

  • जैसे : gatek̕kana,kạmikana.

2.Lạlạiak̕ विधेय की पूरक (complement)  : कभी - कभी  विधेय में विषय के कार्य को और स्पष्ट करने के लिए अन्य शब्द भी आते हैं । 

जैसे :

  • स्थान ,समय  आदि । 
Lạlạiak̕ (विधेय) के प्रकार : 

1.Sadharo̱n Lạlạik̕  {सरल विधेय (simple predicate)}: इसमें केवल क्रिया होती है । 

उदाहरण  :

  • ''Lo̱kho̱ne paṛhaok̕kana.'' लक्ष्मण पढ़ता है । 
  • यहाँ ''paṛhaok̕kana'' विधेय है । 

2.Lạṭu Lạlạik̕ {विस्तृत विधेय (compound predicate)} : इसमें क्रिया के अलावा और भी अन्य शब्द होते हैं ,जैसे :संज्ञा ,सर्वनाम , क्रियाविशेषण ,पूरक आदि  ,जो क्रिया के बारे में अतिरिक्त जानकारी देते हैं ।

उदाहरण :

  • ''Ram setak̕re siok̕e jorạoeda.''
  • यहाँ ''setak̕re siok̕e jorạoeda'' विस्तृत विधेय है । 

संक्षेप में, विधेय वाक्य के विषय के बारे में कुछ जानकारीप्रदान करने वाला भाग होता है ,जो वाक्य को पूर्ण और अर्थपूर्ण बनाता है । 

Kuṛai {कर्म (Object) }: 

कर्म (Object) वाक्य का वह हिस्सा होता है जिस पर क्रिया (verb) का प्रभाव  या कार्य होता है ।  सरल शब्दों में , कर्म वह होता है जो क्रिया से प्रभावित होता है या जिस पर क्रिया की जाती है ।  यह वाक्य के उस विषय से जुड़ा होता है जो क्रिया को अंजाम दे रहा है । 'Kuṛai '''  को हिन्दी में कर्म और अंग्रेजी में  इसे ''Object)'' कहते हैं ।

संताली में कर्म का विवरण :

जब  वाक्य में किसी क्रिया का परिणाम किसी व्यक्ति , वस्तु या स्थान ,पर पड़ता है , तो उसे कर्म कहा जाता है । कर्म क्रिया का वह भाग होता है जो क्रिया का उद्देश्य होता है , यानी क्रिया किसके ऊपर या किसके लिए की जा रही है । 

Kuṛai (कर्म) के प्रकार :  

संताली में मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं :

1. So̱do̱r Kuṛai {सीधा कर्म (Direct object या सक्रिय कर्म )}

यह वह कर्म होता है जो सीधे क्रिया से प्रभावित होता है । यह क्रिया का मुख्य लक्ष्य होता है । 

उदाहरण :

  • ''Ram dakae jo̱mket̕a-राम ने खाना खाया । ''
  • यहाँ ''daka-खाना'' सीधा कर्म है , क्योंकि खाए जाने की क्रिया सेव पर की गई ।

2. O̱ko Kuṛai {अप्रत्यक्ष कर्म (Indirect Object)}:

 यह वह होता है जिसे सीधे क्रिया का परिणाम नहीं मिलता ,लेकिन क्रिया का उद्देश्य या लाभार्थी होता है । 

उदाहरण :

  • ''Lukhi do̱ gidrạ dakae emat̕koa-लुखी बच्चों  को खाना दिया ।''
  • यहाँ ''gidṛạ'' अप्रत्यक्ष कर्म है , क्योंकि उसे ''daka'' दिया गया है , जबकि daka कर्म है , क्योंकि दिया जाना daka पर हो रहा है । 

Kuṛai (कर्म) की पहचान :

कर्म की पहचान के लिए आप वाक्य में ''ce̱t̕-क्या'' या ''o̱ko̱e-कौन'' जैसे प्रश्न  से कर सकते हैं । 

उदाहरण :

  •  ''Lukhi do̱ gidrạ dakae emat̕koa.''
  • सवाल :Lukhi  Ce̱t̕e   emat̕koa?
  • जबाब : daka.( यहाँ ''daka'' सीधा आर्म है)
  • सवाल :O̱ko̱eye emat̕koa?
  • जबाब : gidrạ. ( ''यहाँ gidrạ'' अप्रत्यक्ष कर्म है )

कर्म के उदाहरण :

So̱do̱r Kurại (सीधा कर्म/प्रत्यक्ष कर्म)  :

  • "Ram puthie paṛhaoket̕a."
  • सवाल : Ram ce̱t̕e paṛhaoket̕a?
  • जबाब :Puthi.(यहाँ "puthi"सीधा कर्म है , क्योंकि "paṛhao" क्रिया  "puthi" पर की जा रही है । )

Oko Kurại (अप्रत्यक्ष कर्म)

  • "Mahasoe gidrạko kạhnie ańjo̱mat̕koa "
  • सवाल: Mahasoe kạhni किसको सुनाई ?
  • जबाब : "gidrạko."
  • ( यहाँ "gidrạko" अप्रत्यक्ष कर्म है, क्योंकि क्रिया "ańjo̱m" बच्चों के लिए की गई है । )
  • सवाल: क्या सुनाई ?
  • जबाब: ''kạhni''( यहाँ ''kạhni'' सीधा कर्म है ) । 

Kuṛai ar Eṭak̕ Beako̱ro̱n Hạṭiń (र्म और अन्य व्याकरणिक भाग) :

 Ayat के मुख्यत: तीन घटक होते हैं :

1.Kạmiạ{विषय (उद्देश्य- subject)}:-यह वह जो क्रिया कर रहा है ।

2. Lạlạik̕ { विधेय (predicate)}:- यह वह जो विषय के बारे में जानकारी देता है ।

3.Kuṛai {कर्म (object} : यह वह जिस पर क्रिया का असर होता है ।

अन्य उदाहरण (Eṭak̕ Pạrtul) :

"Lukhi do̱ gidrạko dakae emat̕koa."

  • विषय : "Lukhi"( "Lukhi" वह है जो कार्य कर रही है ) ।
  • क्रिया : "emat̕koa"("emat̕koa" यह कार्य/क्रिया है ) ।
  •  सीधा कर्म : "daka" ( "daka" यह जो दी गई ) ।
  • अप्रत्यक्ष कर्म : ''gidrạ'' (''gidrạ''जिसे दी गई  ) । 
निष्कर्ष (jo̱s katha) :
कर्म (object)  वाक्य में उस व्यक्ति ,वस्तु या स्थान  को कहा जाता है जो क्रिया से प्रभावित होता है ।  यह वाक्य की क्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और वाक्य की पूरी संरचना को समझने में मदद कर सकता है । 
वाक्य के भेद
(Part of Sentence)
{Ayat Reak̕ Hạṭiń}
 
 Ayat वह शब्दों का समूह है जो किसी पूर्ण विचार या भाव को व्यक्त करता है । वाक्य कई प्रकार के हो सकते हैं , जो उनके संदेश और संरचना के आधार पर भिन्न होते हैं । 
 
Ayat Reak̕ Hạṭń {वाक्य के प्रकार (Type of Sentence in Santali )}:
 
1.Mela Ayat {विवरणात्मक वाक्य या कथनात्मक वाक्य}:
 
यह वाक्य उस वाक्य को कहते हैं , जो किसी विचार ,घटना ,तथ्य या जानकारी स्पष्ट रूप से व्यक्त करता है । इसका मुख्य उद्देश्य जानकारी देना होता है । 
उदाहरण (Pạrtul): 
  • Ram do̱ siok̕e calak̕kana.
  • Santal Pargana mit̕ṭen SPT act ạnanak̕ Promo̱ṇḍolkana.
  • Dak̕edae. 

2. Kukli Ayat (प्रश्नवाचक वाक्य):

इस वाक्य के माध्यम के कोई प्रश्न जाता है ।  इसका उद्देश्य किसी जानकारी , विचार या भाव के बारे में पूछना होता है । प्रश्नवाचक  वाक्य के अंत में प्रश्न चिन्ह  (?) का प्रयोग किया जाता है ।

उदाहरण : 

  • Okatem calak̕kana ?-कहाँ जा रहे हो ?
  • Ce̱t̕ am dakam jo̱mkeda ?-क्या आपने खाना खाए ?
  • Noa khe̱t do̱ o̱ko̱eak̕kana ?- यह खेत किसका है ?

Kukli Ayat {प्रश्नवाचक वाक्य (Interrogative Sentences)} वे वाक्य होते हैं जिनमें किसी बात, जानकारी या विवरण के बारे में प्रश्न पूछा जाता है। इन वाक्यों में प्रश्नवाचक चिह्न (?) का प्रयोग किया जाता है, और इनका उद्देश्य किसी विषय के बारे में जानकारी प्राप्त करना होता है। प्रश्नवाचक वाक्य आमतौर पर प्रश्नवाचक शब्दों या सहायक क्रियाओं से शुरू होते हैं। ''Kukli Ayat''  को हिन्दी में प्रश्नवाचक वाक्य और अंग्रेजी में इसे ''Interrogative Sentences)'' कहते हैं ।

Kukli Ayat के प्रकार:

  1. 'Hẽ̱' या 'baṅ' में उत्तर देने वाले प्रश्न (Yes/No Questions): ऐसे प्रश्न जिनका उत्तर केवल 'Hẽ̱' या 'baṅ'  में दिया जा सकता है।

    उदाहरण:

    • Ce̱t̕ am dakam jo̱mkeda ? -क्या तुमने खाना खा लिया?
    • (उत्तर: 'Hẽ̱' या 'baṅ'-हाँ या नहीं)
    • ce̱t̕ uni gupie calaolena ?-क्या वह बगाली करने गई थी?
    • (उत्तर:'Hẽ̱' या 'baṅ'-हाँ या नहीं)
  2. विस्तृत जानकारी प्राप्त करने वाले प्रश्न (Wh-Questions): ये प्रश्न "o̱ko̱e", "tis/tinre", "c̱e̱t̕", "okare", "cedak̕", "cekate", 'tinak̕'' आदि प्रश्नवाचक शब्दों से शुरू होते हैं और उत्तर में विस्तृत जानकारी की अपेक्षा रखते हैं।

    उदाहरण:

    • Okatem calak̕kana ? - तुम कहाँ जा रहे हो ?
      (उत्तर: किसी स्थान का नाम जैसे - Hạṭiạ-हटिया , iskul-स्कूल)
    • Noa kạmi ce̱t̕ lekateko kạmia? - यह काम कैसे किया जाता है?
      (उत्तर: क्रियाविधि या तरीका)
  3. विकल्प वाले प्रश्न (Choice Questions): इन प्रश्नों में उत्तर के रूप में विकल्प दिए जाते हैं, और उत्तर देने वाले को उन विकल्पों में से एक को चुनना होता है।

    उदाहरण:

      Dak̕em ńuia se̱ ca ?- तुम पानी पियोगे या चाय ?

    • (उत्तर: dak̕ se̱ ca- पानी  या  चाय में से एक)
  4. टैग प्रश्न (Tag Questions): यह प्रश्नात्मक वाक्य का एक प्रकार है, जिसमें पहले सामान्य वाक्य होता है और अंत में एक छोटा प्रश्न जोड़ दिया जाता है ताकि उत्तर में सहमति या असहमति की पुष्टि की जा सके।

    उदाहरण:

    • Gapam hijuk̕kana, tho̱ ? - तुम कल आ रहे हो, ना?
      (उत्तर:
      'Hẽ̱' या 'baṅ'-हाँ या नहीं)
    • Uni iskule calaolena, tẖo̱ ? - वह स्कूल गई थी, है ना?
      (उत्तर:
      'Hẽ̱' या 'baṅ'- हाँ या नहीं)

Kukli Ayat के कुछ और उदाहरण:

  • Celeama ? -तुम्हारा नाम क्या है?
    (उत्तर: नाम बताना होगा)

  • Unie do̱e o̱ko̱ekana ? -वह कौन है?
    (उत्तर: किसी व्यक्ति का परिचय देना होगा)

  • Biḍạu tiskana ? -परीक्षा कब है?
    (उत्तर: तारीख बतानी होगी)

निष्कर्ष (jo̱s katha) :

प्रश्नवाचक वाक्यों का उपयोग हम तब करते हैं जब हमें किसी बात की जानकारी या स्पष्टीकरण चाहिए होता है। यह वाक्य हमारे रोजमर्रा के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं, जिनके माध्यम से हम संवाद करते हैं और अपने विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। प्रश्नवाचक वाक्य वार्तालाप को जीवंत बनाते हैं और समझदारी बढ़ाने का माध्यम होते हैं।


3.Hukum Ayat (आदेशात्मक वाक्य) :

इस प्रकार के वाक्य का उद्देश्य आदेश , अनुरोध ,सलाह या निवेदन करना होता है । आदेशात्मक वाक्य में अक्सर संताली में हिदी के 'आप','तुम' ,'तू' के लिए एक मात्र शब्द है,अंग्रेजी के तरह  और वह शब्द है 'am' है ।

  Hukum Ayat (Imperative Sentences) वे वाक्य होते हैं जिनमें किसी कार्य को करने या न करने का निर्देश या आदेश दिया जाता है। इन वाक्यों में प्रायः "am" सर्वनाम का प्रयोग नहीं होता, लेकिन यह समझा जाता है कि वाक्य का निर्देश या आदेश सुनने वाले को ही दिया जा रहा है । संताली में ''do''और  ''alo'' शब्द है यह वाक्य के प्रारंभ में प्रयगो किया जाता है । इसके अलावा भी है जो क्रिया शुरु होता है । ''Hukum Ayat''  को हिन्दी में आदेशात्मक वाक्य और अंग्रेजी में इसे ''Imperative Sentences.'' कहते हैं ।

उदाहरण:

  1. sińme.
    (यहाँ 'am' समझा जा रहा है, वाक्य का उद्देश्य आदेश देना है।)

  2. Usạra hijuk̕me.
    (आदेशात्मक रूप से बुलाने के लिए कहा गया है।)

  3. No̱ṇde̱ alom duṛup̕a.
    (कार्य न करने का आदेश दिया जा रहा है।)

  4. Amak̕ kạmi purạutam.
    (यहाँ आदेश दिया जा रहा है कि कार्य समाप्त किया जाए।)

व्याख्या:

आदेशात्मक वाक्यों में सामान्यत: क्रिया का प्रयोग वाक्य के आरंभ में होता है, और यह वाक्य किसी को कुछ करने या न करने का निर्देश देते हैं। ये वाक्य सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूप में हो सकते हैं:

  • सकारात्मक आदेश: "Kạmie me." (करने का निर्देश)
  • नकारात्मक आदेश: "Alom kạmia" (न करने का निर्देश)

आदेशात्मक वाक्य रोजमर्रा की बातचीत में बहुत सामान्य हैं, विशेषकर जब हमें दूसरों से कोई कार्य करवाना होता है।


 उदाहरण :  

  • Beret̕me.-उठो ।
  • Dak̕ ạguạńme. पानी ला दो ।
  • Alom raga. - मत रो । 

4.Bhabna - rạskạ Ayat -Hahaṛ (विस्मयादिबोधक वाक्य) :

 विस्मयादिबोधक वाक्य  वह वाक्य होता है जिसमें किसी भाव ,आश्चर्य ,खुशी,दुख ,क्रोध  या किसी अन्य तीव्र भावना को व्यक्त किया जाता है । इन वाक्यों में एक खास तरह का  उत्साह या भावनात्मक अभिव्यक्ति होती है । विस्मयादिबोधक वाक्य का अंत आमतौर पर विस्मयादिबोधकचिन्ह ( ! ) के साथ होता है । Bhabna - rạskạ Ayat - Hahaṛa को हिन्दी में विस्मयादिबोधक वाक्य और अंग्रेजी में इसे ''Interjection Sentence.'' कहते हैं ।̣

उदाहरण :

  •  Bah ! ạdi mo̱ńj murtim benaokedea. -वाह ! बहुत अच्छा मूर्ति बनाए हो ।
  • Haere ! uni do̱ tise bạṛic̕ena.-हाय ! वह कब देहांत हो गया ।
  • Mase ! teheń tinak̕ rabaṅkana ! -आज कितना ठंड है !
  • Haere ! tisem he̱c̕ena ?  - अरे ! तुम कब आया ?
  Bhabna - rạskạ Ayat-Hahaṛa वाक्य के उदाहरण और व्याख्या : 
''Bah ! ạdi mo̱ńj murtim benaokedea.''
  • इसमें आश्चर्य और प्रशंसा की भावना व्यक्त की जा रही है । 
  •  ''Bah'' शब्द भाव को और भी अधिक प्रभावशाली बनाता है । 
  • अंत में विस्मयादिबोधक चिन्ह ( ! ) से भावना की तीव्रता को दर्शाया गया है ।

 ''Haere ! uni do̱ tise bạṛic̕ena.''

  • इस वाक्य में आश्चर्य की भावना व्यक्त की गई है कि व्यक्ति की देहांत हो गई । 
  • ''Haere'' शब्द से व्यक्ति की  मृत्यु की स्थिति और विस्मय प्रकट हो रहा है । 

''Mase ! teheń tinak̕ rabaṅkana.''

  • इस वाक्य में आश्चर्य और असुविधा की भावना व्यक्त की गई है कि मौसम बहुत ठंडा है । 
  • ''tinak̕'' शब्द ठंड की  तीव्रता को दर्शा रहा है ।
 ''Haere ! tisem he̱c̕ena''
  • इस वाक्य में आश्चर्य की भावना व्यक्त की गई कि व्यक्ति अचानक सामने आ गया । 
  •   ''Haere'' शब्द से अचानक की स्थिति प्रकट हो रही है ।  
 
Bhabna - rạskạ Ayat  वाक्य:
  • यह वाक्य किसी तीव्र भावना या अचानक प्रतिक्रिया को दर्शाता है । 
  • ऐसे वाक्य के संत में  विस्मयादिबोधक चिन्ह ( ! ) का प्रयोग किया जाता है । 
  • इन वाक्य में जो भाव व्यक्त होता है , वह अधिक शक्तिशाली और तीव्र होता है । 
  • वाक्य संक्षिप्त या विस्तृत हो सकते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य हमेशा भावना को जोदार तरीके से व्यक्त करना होता है । 
निष्कर्ष :
विस्मयादिबोधक वाक्य का प्रयोग भावनाओं को अत्यधिक तीव्र और प्रभावशाली  तरीके व्यक्त करने के लिए किया जाता है । ये वाक्य खुशी , दुख ,आश्चर्य ,क्रोध ,भय ,आदि किसी भी तीव्र भावना को स्पष्ट और सशक्त रूप से व्यक्त करते है ।  इन वाक्यों की तीव्रता को दर्शाने के लिए विस्मयादिबोधक -? चिन्ह  का उपयोग किया जाता है , जो वाक्य को अधिक प्रभावशाली बनाता है ।

 5. Joṛao Ayat (संयुक्त वाक्य)  :

इस प्रकार के वाक्य  में दो  या अधिक स्वतंत्र उपवाक्यों  को संयोजक  शब्दों , जैसे : 'ar','menkhan ' ,'se' से जोड़कर बनाया जाता है । प्रत्येक उपवाक्य स्वतंत्र रूप से अपना अर्थ व्यक्त करता है । ''Joṛao Ayat''  को हिन्दी में संयुक्त वाक्य और अंग्रेजी में इसे ''compound sentence'' कहते हैं । 

 उदाहरण :  

  • Ram  do̱e siok̕kana ar Lukhi do̱ gạchiy tot̕et̕kana.-राम खेत जोत रहा है और लुखी बिचन उखाड़ रही है ।
  • Mit̕ dhao  Rame phelena, me̱nkhan dosar  dho̱e do̱e pasengea.-एक बार राम अनुत्तीर्ण हुआ ,लेकिन दूसरी बार उत्तीर्ण हो ही गया ।
  • chaAmem si daṛeak̕a se̱m ãṛgo̱m darẹak̕a .-आप जोत सकते हो  या पाटा चला सकते हो ।
  • Dakam jo̱ma se̱ piṭhạ - आप भात खाइएगा या रोटी । 

6. Mesal Ayat (मिश्र वाक्य) :

स प्रकार के वाक्य में एक मुख्य उपवाक्य और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य होते  हैं । उपवाक्य स्वतंत्र रूप से अर्थपूर्ण नहीं होते और उन्हें मुख्य उपवाक्य की आवश्यकता होती है । इस प्रकार के वाक्य में अक्सर संबंधबोधक शब्द जैसे : o̱kọe do̱,oka do,tinre, tobe,e̱ṇḍe̱khan,judi,cedak̕je. 

''Mesal Ayat'  को हिन्दी में  मिश्र वाक्य  और अंग्रेजी में इसे ''complex sentence'' कहते हैं । 

उदाहरण :

''Tinre ińiń calaoena, tobey dak̕et̕kan tahẽ̱kana.-जब मैं गया ,तो बारिश हो रहा था ।''
  • Aso̱l Huḍiń Ayat (मुख्य उपवाक्य) : ''tobey dak̕et̕kan tahẽ̱kana'' .(यह स्वतंत्र रूप से अपना अर्थ व्यक्त करता है )
  • Ṭehaḍ Huḍiń Ayat (आश्रित उपवाक्य) :''Tinre ińiń calaoena'' (यह वाक्य अकेले स्पष्ट नहीं होता , इसे मुख्य उपवाक्य की जरूरत है । )
  • दोनों उपवाक्य को जोड़ने के लिए ''tinre'' और ''tobe''प्रयोग किया गया है
''O̱ko̱eṭak̕ ho̱ṛ o̱ṇde̱y teńgoakan takẽ̱kan, uni do iń babagey tahẽ̱kana.
                   (Ṭehaḍ Huḍiń Ayat)                                           (Aso̱l Huḍiń Ayat)
 
 जो व्यक्ति वहाँ खड़े है ,वह मेरे पिताजी हैं ।''
 
  •  Aso̱l Huḍiń Ayat (मुख्य उपवाक्य) : 
  ''uni do iń babagey tahẽ̱kana''
  •  Ṭehaḍ Huḍiń Ayat (आश्रित उपवाक्य ):  
''O̱ko̱eṭak̕ ho̱ṛ o̱ṇde̱y teńgoakan takẽ̱kan''
  •  दोनों उपवाक्य को जोड़ने के लिए  ''o̱ko̱e''  का प्रयोग किया गया है
''Judi amem mihnạt lekhac̕ honaṅem ,  paskok̕a hutic̕.-अगर आप मेहनत की होती , तो आप पास हो जाते ।''
  •  Aso̱l Huḍiń Ayat (मुख्य उपवाक्य) : ''paskok̕a hutic̕.''
  •  Ṭehaḍ Huḍiń Ayat (आश्रित उपवाक्य) : ''Judi amem mihnạt lekhac̕ honaṅem.'' 
  •  दोनों उपवाक्य को जोड़ने के लिए  ''Judi''  का प्रयोग किया गया है

Mesal Ayat (मिश्र वाक्य की विशेषताएं ): 

  • इसमें एक मुख्य उपवाक्य होता है जो स्वतंत्र रूप से अपना अर्थ स्पष्ट करता है ।
  • इसमें एक या अधिक आश्रित उपवाक्य  होते हैं  जो मुख्य उपवाक्य पर निर्भर होते हैं । 
  • आश्रित उपवाक्य अकेले कोई पूर्ण अर्थ  नहीं देता , इसे समझने के लिए मुख्य उपवाक्य की जरूरत होती है । 
  • इन वाक्यों में संबंधबोधक शब्द या उपसर्ग (जैसे : o̱kọe do̱,oka do,tinre, tobe,e̱ṇḍe̱khan,judi,cedak̕je,okare) प्रयोग किया गया है ।
 

 Sadharo̱n ayat (सरल वाक्य) :

यह एक ऐसा वाक्य होता है जिसमें केवल एक मुख्य उपवाक्य होता है । इसमें एक ही मुख्य क्रिया होती है और एक ही विचार व्यक्त किया जाता है ।

''Sadharo̱n ayat''  को हिन्दी में  सरल वाक्य और अंग्रेजी में इसे ''Simple Sentence'' कहते हैं । 

 उदाहरण :

  • Ram dakae jo̱me̱t̕a.-राम खाता है ।
  • Uni puthie paṛhaok̕kana.-वह किताब पढ़ता है ।
  • Uni khetre hoṛoe rok̕ho̱ekana.-वह खेत में धान रोपती है । 

Jo̱s katha (निष्कर्ष) :

वाक्य एक भाषा की मूल इकाई होती है , जिसके माध्यम से हम अपने विचार ,भावनाएं , इच्छाएं , और क्रियाएं व्यक्त करते हैं । वाक्य विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं , जैसे : विवरणात्मक ,प्रश्नवाचक , आदेशात्मक ,विस्मयाधिबोधक आदि । प्रत्येक प्रकार का वाक्य एक विशिष्ट उद्देश्य पूरा करता है , जिससे भाषा का उपयोग सरल और प्रभावी हो जाता है ।

 

 Worked out ( हल किया हुआ उदाहरण ) :

1. इनमें से प्रत्येक वाक्य के बारे में बताएं  कि वह किस तरह का वाक्य है :-

  • Ce̱t̕ amem aṅgo̱ce̱t̕kangea ?- Kukli
  • Lo̱khon do̱e paṛhaok̕kana. - Mela ayat
  • Ce̱t̕ am gapam calak̕gea ?-Kukli
  • Do calak̕me.-Hukum
  • Dayakate go̱ṛo̱ạńme.-Hukum
  • Haere ! tinạk̕ mõ̱ńj baha.-Bhabna - rạskạ Ayat-Hahaṛa
  • Auriń sạtạk̕a.-Mela ayat
  • Celeama ?-Kukli
  • Hạṇḍi alom ńuia.-Hukum
  • Chitạ do̱e kuṛi ho̱po̱nkana.-Mela ayat
  • Cet̕ amdo̱m dakṭo̱rkana?- Kukli
  • Ce̱t̕ noa do̱ sonakana se̱ baṅ ?- Kukli
  • haere ! tinạk̕ usulae nui do̱ .-Bhabna - rạskạ Ayat-Hahaṛa
  • Aema bo̱cho̱rem jivedok̕ ma baṛe̱ !-Hukum
  • Mit̕ tharre teṅgok̕pe.-Hukum
  • Uni do̱ bae koṅkawa.-Mela ayat
 
Ạkil Bhańjao (अभ्यास)
1.इनमें से प्रत्येक वाक्य के बारे में बताएं कि वह किस तरह का वाक्य है । 
Pạrtulko (उदाहरण): Ạkil bhańjaotam -Hukum
Noa do̱ ulkana- Mela ayat 


  • Ko̱lo̱m sabme ar iskul calak̕me.
  • Noa tale dọ̱ usulgea.
  • Uni do̱e kulkana.
  • Noa do Jaher Thankana.
  • Haere! ạḍi mo̱ńj sạṛitae.
  • Ce̱t̕ am gapam hijuk̕a
  • Dayakate go̱ṛo̱aeme.
  • Is !jạnumiń ro̱k̕ena.
  • Ram ar Chitạtạkinkin baplaeyena.
  • Tinre ińiń calak̕a, tobem daka jo̱m oṛk̕em hijuk̕a.
  • O̱ko̱ṭak̕ koṛa pạńcji deṅgawakat̕, uni doe iń dadakana.


2. निम्नलिखित वाक्यों में उपयुक्त kukli sabad (प्रश्न शब्द ) को जोड़कर वाक्य बनाएं । 
Pạrtulko (उदाहरण):  ....... am gapa Dumkạm calak̕kana ?
Ce̱t̕ am gapa Ḍumkạm calak̕kana ?  (tin,tin din, ce̱t̕,oka,ce̱t̕lekan,cedak̕,oka lekate,ce̱t̕te, o̱ko̱e,tinre,tis,tinạk̕ ,tisok̕, tin jokhe̱c̕,okare,okaren,oka hilok̕, cekaleka,etc.)
 
  • Piprạ ato do̱ .......menak̕a?
  • Sam Pargana do̱ ..........e tahẽ̱kana? 
  • Rãci reak̕ Rajdhani reak̕ ńutum do̱.........kana?
  • Tilkạ Mạńjhiak̕ jo̱nom mãhã do̱ .........kana?
  • ........m clak̕a?
  • .........m kạmia?
  • .........m calak̕a?
  • ........pe kạmia? 

3. निम्नलिखित उत्तर पाने के लिए दिये गये शब्दों का प्रयोग कर प्रश्न बताएं ।  
Pạrtul (उदाहरण): Iń do̱ Ramiń ko̱yo̱k̕ ho̱rakadea.      O̱ko̱e.........
=O̱ko̱eyem ko̱yok̕ ho̱rakadean?

  • Lukhi hoṛoe ro̱k̕ho̱ekana.      

       Ce̱t̕ ?
      O̱ko̱e?
 
  • Ińren gidrạko do̱ iń soṅge o̱ṛak̕re menak̕ko̱.
 
       Okare ?
       O̱koe ?
 
  • Amren ḍaṅrakin do̱ khe̱tre bạnuk̕kinạ. 

       Cele ?
       O̱ko̱e ?
 
  • Mańjhi  do̱e besgea.

 

       O̱ko̱e ?
 
  • Bar pại caoley kirińkeda.
         Tinạk̕ ?
 
  • Hul Mãhã do̱ 30 jun hilok̕ko manaoa.
 
        Tis ?
 
4. नीचे  दिए गये hukum ayat को mela ayat में बदलें । 

उदाहरण : Uni do̱ Rame metaekana, "Duạr sińme."
=Uni do̱ Ram duạr sisińe metaekana.
 
1. Cecet̕   dại do̱ cecet̕ gidrạko metakokana,"Mit̕ṭen ciṭhi o̱lpe"
 
 2. Go̱go̱ do̱ ac̕ren ho̱po̱ne metaekana, "Mobael alom ńe̱la."

3. Baba ac̕ren ho̱po̱ne metaekana," Iskul din do̱ bilạmte alom beret̕a."

4. Mahasoe do̱ ac̕ren cecet̕ gidrạkoe metat̕koa, "Bhage puthiko paṛhaok̕pe."

5. Cecet̕ gidṛko ac̕ren mahasoeko metadea, " Kukli armit̕ dhao dohaṛeme."

6.Lo̱kho̱n do̱ miserate mtadea, " Hoṛo ge̱t̕ go̱ṛo̱ạńme."



Sabad Hạṭtiń (Part of Speech)
शब्द -भेद 
 
Sabad Hạṭtiń शब्द-भेद (Part of Speech) का अर्थ है वाक्य में शब्दों का वह वर्गीकरण, जो उनके कार्य और प्रयोग के आधार पर किया जाता है। Sabad Hạṭtiń को  हिन्दी में शब्द-भेद और अंग्रेजी  में Part of Speech कहते हैं । Sabad Hạṭtiń संताली  में  मुख्य रूप से आठ प्रकारों में विभाजित किया जाता है:

Ńunum संज्ञा (Noun):

 किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु, गुण, अवस्था या भाव का बोध कराने वाले शब्द Ńunum कहलाते हैं, Ńunum को  हिन्दी में   संज्ञा  और अंग्रेजी  में Noun कहते हैं ।। जैसे: Ram, Lo̱kho̱n, Hoṛo, Dumkạ,Pạrịṛdaha, Rạskạ, Haso,आदि।

Ujnum सर्वनाम (Pronoun)

जो संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किए जाते हैं, वे Ujnumकहलाते हैं। Ujnum  को  हिन्दी में   सर्वनाम और अंग्रेजी  में  Pronoun कहते हैं । जैसे: Uni, Nui,Noa,Hana,Nhãwã,Hanḍẹ,Nhaṇḍe̱,Hạni,Nhại,Hạni,Nhạko Iń,Am,  आदि।

Gunum विशेषण (Adjective):

 जो शब्द Ńunum या Ujnum की विशेषता बताते हैं, उन्हें Gunum कहते हैं। Ńunum को  हिन्दी में   संज्ञा  और अंग्रेजी  में Noun कहते हैं । जैसे: He̱nde̱,Poṇḍ,Arak̕, Lạtu, Kạṭic̕,Jeleń, Osar,Khaṭo,Usul,Phe̱ḍ, E̱se̱l,Tels ãw̃ãr आदि।

Kạjnum क्रिया (Verb)

जो शब्द किसी कार्य के होने या करने का बोध कराते हैं, उन्हें  Kạjnum कहते हैं। Kạjnum को  हिन्दी में   क्रिया और अंग्रेजी  में Verb कहते हैं । जैसे: Jo̱m, Ńu, Dạr, O̱l, Paṛhao, Gitic̕, आदि।

Kạjnum-Gunum क्रिया-विशेषण (Adverb):

 जो शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं, उन्हें Kạjnum-Gunum कहते हैं। Kạjnum-Gunum को  हिन्दी में क्रिया-विशेषण  और अंग्रेजी  में Adverb कहते हैं । जैसे: Ạḍi, Bại-bại .Gapa, Beṛhaete, Kudạm se̱c̕re,Haṇḍe̱,No̱ṉḍe̱,Nhaṇḍe̱,Nho̱ṇḍe̱ , आदि।

Jok̕raowak̕ संयोजक (Conjunction)

जो शब्द दो या दो से अधिक शब्दों, वाक्यों या वाक्यांशों को जोड़ने का काम करते हैं, उन्हें  Jok̕raowak̕ कहते हैं ।  Jok̕raowak̕ को  हिन्दी में   संयोजक और अंग्रेजी  में Conjunction कहते हैं । जैसे: Ar, Ar baṅ khan ,Me̱nkhan ,S̱e̱ आदि।

Haharạ-Rạskạ-Bhabna विस्मयादिबोधक (Interjection):

 जो शब्द अचानक उत्पन्न हुई भावनाओं को व्यक्त करते हैं, उन्हें  Haharạ-Rạskạ-Bhabna कहते हैं।  Haharạ-Rạskạ-Bhabna को  हिन्दी में   विस्मयादिबोधक   और अंग्रेजी  में Interjection कहते हैं । जैसे:Haere !, Is !, Aego !,Bah̕ bah̕ !,Ọh̕ ọh̕ !,uh̕ uh̕ !, Ih̕ ih̕ !,Hae hae !, , आदि।

Mucạt̕ Jorạo  परसर्ग/प्रत्यय   (Postposition/Suffi)

वे शब्द जो Ńunum  या Ujnum के पहले आकर उनके साथ अन्य शब्दों का संबंध बताते हैं, उन्हें पूर्वसर्ग Mucạt̕ Jorạo कहते हैं। Mucạt̕ Jorạo  को  हिन्दी में परसर्ग/प्रत्यय   और अंग्रेजी  में Postposition/Suffix  कहते हैं । जैसे: Lạgit̕ ,re,te, ho̱te̱te ,ren ,ak̕ ,aṅ , reaṅ

ये Sabad Hạṭtiń  वाक्य में शब्दों के प्रयोग और उनके अर्थ को स्पष्ट करते हैं।

Ńunum संज्ञा (Noun):
Ńunum वह शब्द है, जो किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, जीव-जंतु, गुण, अवस्था या भाव का नाम बताता है। सरल शब्दों में, जो भी चीजें हमें दिखाई देती हैं या जिनका हम अनुभव कर सकते हैं, उनका नाम Ńunum कहलाता है। हिन्दी में संज्ञा और अंग्रेजी  में Noun  कहते हैं ।
Ńunum के भेद: हिन्दी में Ńunum को मुख्यतः पाँच प्रकारों में विभाजित किया गया है:
1.Ńutum Lạlạiak̕ Ńunum व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun):
 
यह किसी विशेष व्यक्ति, स्थान, वस्तु , या जीव के नाम को दर्शाती है। व्यक्तिवाचक संज्ञा का प्रयोग विशेष नामों के लिए होता है।
उदाहरण:Sidạ Kạnhu,tilkạ Mạńjhi, Cand Bhaero, Phulo Jhano, Sunạ, Co̱ro̱n, Budhrại,Basnại Gaḍa,Pańcet Buru Godo,Patna Buru,Hirạnpur,Pakọṛ, Sahe̱bgo̱ńj, Gaḍa,Bharo̱t, Pariardaha,Amṛapaṛa, Ḍumkạ. 
पर्व -त्योहारों का नाम - Sohrae, Mak̕ mõ̱ṛẽ̱. E̱ro̱k̕,Baha,Janthaṛ.
पुस्तकों का नाम - Haṛmawak̕ Ato,O̱jo̱e Gaḍa Dhipre, Santali Dictionry.
शहरों का नाम - Dilli, kolkata, Pako̱ṛ,Bạmbại.
 
2.Jạt Lạlạial̕ Ńunum जातिवाचक संज्ञा (Common Noun):
 
यह एक पूरी जाति, वर्ग, या समूह को दर्शाती है, जो एक जैसी विशेषताओं वाले Ho̱r, Jinis, Jaega या प्राणियों के लिए उपयोग में लाई जाती है।
उदाहरण: Manwa,Joṇḍra,Oṛak̕,Buru,Gại, Ḍaṅgra,Mero̱m,Seta,Pusi,Puthi,Dare,Gaḍa,Koṛa, So̱ho̱r, Gaḍa, Puthi, Seta, Janwar , Cẽ̱ṛẽ̱,ho̱ṛ, ghãs, hoṛo, Hako.
 
 Jạt Lạlạial̕ Ńunum                                                Ńutum Lạlạiak̕ Ńunum
       ( जातिवाचक संज्ञा)                                                  (व्यक्तिवाचक संज्ञा)                                Hoṛo -                                                   Bhạdại hoṛo,
                                                                        he̱nde̱ bhạdại,
                                                                        poṇḍ bhạdại,
                                                                        bispṭiạ,
                                                                        ciṅgul hoṛo,
                                                                        sạṭhi bhạḍai,
                                                                        e̱r hoṛo,
                                                                         bismuniạ,
                                                                         iri bhạdai,
                                                                         sorna hoṛo,
                                                                         so̱ hoṛo,
                                                                          rạghusạl,
                                                                           rajmo̱ho̱l hoṛo.
 
Puthi -                                                            Haṛmawak̕ Ato,
                                               Ho̱ṛkoren Mare Hapṛamko Reak̕ Katha,
                                               Ho̱ṛ Ho̱po̱nak̕ Sedae Katha,
                                               Parsi do̱ Somaj Reak̕ Ạrsi,
                                              Pạrsi do̱ Ame Sãohãmea. 
 
Cẽ̱ṛẽ̱-                                                 kạ̃hũ,
                                                           kisni,
                                                          kõ̱k̕,                                                                                                                                                 kikir,
                                                              guṇḍri,
                                                              potam                                                                                                                                        miru                                                                                                                                           ṭoya,                                                                                                                                               ko̱ko̱r etc.
 
Gaḍa-                                            Basnại Gaḍa,
                                                     Nạ̃i Gaḍa,
                                                     O̱jo̱e Gaḍa,
                                                    Gumạni Gaḍa etc.  
 
Ho̱ṛ-                                                        Ram,
                                                            Co̱ro̱n,                                                                                                                                         So̱m,
                                                              Pagan,                                                                                                                                         Lukhi,
                                                               So̱mae,
                                                                Budhrại,
                                                                Bahamuni,
                                                               Surujmuni etc.                                                                
 
 
3.Dhạu Lạlạiak̕ ́Ńunum भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun):
 
यह संज्ञा उन भावों, गुणों, या अवस्थाओं को दर्शाती है, जो हमारी इंद्रियों से सीधे अनुभव नहीं की जा सकतीं, बल्कि केवल महसूस की जा सकती हैं।
उदाहरण: - Nindhạnte̱t̕,Rabaṅte̱t̕, lo̱lo̱tet̕,Bujhạute̱t̕,Jeleńte̱t̕, Korạte̱t̕,Hasote̱t̕,Lelhate̱t̕,Koṅkate̱t̕,Kusi, Rạsḳ, Duk,Cehra/Cehra,Ạkil,gatete̱t̕, he̱re̱lte̱t̕ , Haṛamte̱t̕.
 Dhạu Lạlạiak̕ ́Ńunum भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun) , Jạt Lạlạial̕ Ńunum जातिवाचक संज्ञा (Common Noun),Gunum विशेषण (Adjective)  और Kạjnum (क्रिया) , मध्यसर्ग (Infi) और प्रत्यय (Sufi) लगाकर बनता है ।  दो affi ये हैं -"te̱t̕ ", "n" "p". इससे बनने वाले भाववाचक संज्ञा निम्न हैं -
 
  te̱t̕ प्रत्यय (Suffi.) लगाकर :
 
संज्ञा  से भाववाचक संज्ञा:
 Kuṛi +te̱t̕ =Kuṛitẹt̕, Koṛa+te̱t̕ =koṛte̱t̕, Gate+te̱t̕Gatete̱t̕, Manwa+te̱t̕ Manwate̱t, Janwar +te̱t̕ Janwarte̱t.
 विशेषण से भाववाचक संज्ञा:
lo̱lo̱ +te̱t̕lo̱lo̱te̱t̕,lelha +te̱t̕lelhate̱t̕,Oṇḍyot̕ +te̱t̕Oṇḍyot̕te̱t̕,Khacaṛ +te̱t̕ Khacaṛte̱t̕ , Bo̱bẹ +te̱t̕ Bo̱bẹte̱t̕,Co̱ṭkaṛ +te̱t̕ Co̱ṭkaṛte̱t̕.   
 
 n मध्यसर्ग (Infi.) लगाकर :  
क्रिया से भाववाचक संज्ञा :
 Rakap̕=Ra+(na)+kap̕=Ranakap̕, Bo̱do̱l=Bo̱+(n)+do̱l=Bo̱ndo̱l,  Ạcur=Ạ+(nạ)+cur=Ạnạcur.,Um=u+(nu)+m=unum   ,Ãṛgo=-ã+(na)+ṛgo=   ãnaṛgo  , E̱se̱t̕=e̱+(ne̱)+se̱t̕=e̱ne̱se̱t̕ etc.

 p मध्यसर्ग (Infi.) लगाकर :
e̱ho̱p̕= e̱+(pe̱)+ho̱p̕=e̱pe̱ho̱p̕,sikup̕ =si+(pi)+kup̕= sipikup̕ etc.
 
 4.Do̱l Lạlạiak̕ Ńunum समूहवाचक संज्ञा (Collective Noun) :
 
 यह संज्ञा किसी समूह या झुंड का बोध कराती है, जो एक साथ कई व्यक्तियों या वस्तुओं को दर्शाता है।
उदाहरण:Palṭo̱n,Bhiṛ,Kilạs, do̱l, Akhṛa,Mela,Bạisi,Sabha,
 
5. Durib Lạlaiak̕ Ńunum द्रव्यवाचक संज्ञा (Material Noun):

यह संज्ञा उन पदार्थों या द्रव्यों को दर्शाती है, जिनसे अन्य वस्तुएँ बनाई जाती हैं।

उदाहरण: Sona, Cạndi, kaṭ, dak̕,Sunum, Guhum.
 
इन सभी प्रकारों के माध्यम से Ńunum
के अलग-अलग रूपों को समझा जा सकता है, जो भाषा में विभिन्न चीजों को अभिव्यक्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  
Ạkil Bhańjao (अभ्यास) उदाहरण
निम्नलिखित वाक्यों में से सभी ńunum को चिन्हित कर उनके नाम लिखें :
(Ńutum Lạlạiak̕ Ńunum Ńu.LŃ.
 Jạt Lạlạial̕ ŃunumJạ.L.Ń.
Dhạu Lạlạiak̕ ́ŃunumDh.LŃ.
Do̱l Lạlạiak̕ ŃunumDo̱.L.Ń.
Durib Lạlaiak̕ Ńunum=Du.L.Ń.)
1.Ram dọ sunum le̱n ocoeye se̱nakana.
     Ńu.LŃ         Du.L.Ń.
2.Lukhi do̱ sukri lobok̕e emakokana.
     Ńu.LŃ.      Jạ.L.Ń
3.Nahe̱lre mẽ̱ṛhẽ̱t̕ reak̕ pal lagaoakana.
       Jạ.L.Ń.        Du.L.Ń.           Ńu.LŃ.
4.Bạjun do̱e Naekikkana.
     Ńu.LŃ.         Jạ.L.Ń.
5.Nui cẽ̱rẽ̱ do̱e hisi cẽ̱ṛẽ̱kana.
  Ńu.LŃ.                             Jạ.L.Ń.
6.Basnại gaḍa reak̕ do̱ bo̱ḍe̱gea.
          Ńu.LŃ.    
7.P.O. Boḍiṅ do̱e Norwerenkana.
           Ńu.LŃ.                      Ńu.LŃ.    
8.Noa bo̱to̱lre do̱ sunum menak̕a.
            Jạ.L.Ń.                 Du.L.Ń
9. Noa do̱ guhum reak̕ aṭakana.
                 Du.L.Ń.             Du.L .Ń. 
10. Toa reak̕ dạhi, ro̱sgula ar go̱to̱m  benaok̕kana.
        Du.L.Ń           Du.L.Ń        Du.L.Ń             Du.L.Ń
 
1. नीचे दिए गये वाक्यों में सभी प्रकार के  ńunum (संज्ञा)को चिन्हित करें और उसके बाद उन्हें अपनी कॉपी में लिखें । 
उदाहरण :   Ram do̱ utiń sunume kiriń ạgukeda.    Ńunum (संज्ञा): Ram,sunum.
                Ńu.LŃ.                             Du.L.Ń. 
 
1. Ale the̱c̕ lạṭu lạṭu gại ḍṅgra menak̕ koa.
2. Ram do̱ utiń sunume kiriń ạgukeda.
3. Lukhi do̱ hoṛoe ro̱k̕ho̱ekana.
4. Go̱go do̱e pik̕ṭhạkana.
5. Baba do̱ mẽ̱ṛhe̱t̕ reak̕ parko̱me benaokeda.
6. Phe̱kṭạrire sunumko le̱ne̱t̕a.
7. Bạisire Lo̱kho̱nko bicạr dusikedea.
8. Co̱ro̱n ar Lukhitạkin mela ńe̱ńe̱lkin se̱nakana.
9. Bahamuni do̱ dak̕ loloe se̱nakana.
10. Baha do̱ sona reak̕ pagrae ho̱ro̱k̕akat̕a.


2.  निम्नलिखित शब्दों से रिक्त स्थानों को भरें । 
me̱t̕              duạr                seta            
sereń             dak̕                ṭạṇḍi

(ऊपर दिए गये सभी शब्द ńunum (संज्ञा) हैं । )

1. Manwa do̱.......tebo ńe̱ńe̱la.
2. .........e bhobok̕kana.
3. Ram dọ daṅgra ........e ńuakokana.
4. Gaenaha do̱ko .......... baṛaea.
5. Gidrạko bo̱l e̱ne̱c̕ ...........reko gatek̕kana.
6. ........... ac̕te jhic̕ena.
 
3. अपनी  कॉपी में बताए तरीके से निम्नलिखित वाक्यों में से ńunum को चुनकर उपयुक्त शीर्षक के नीचे लिखें । 
Ńutum Lạlạiak̕ Ńunum             Jạt Lạlạiak̕ Ńunum         Durib Lạlạiak̕ Ńunum
      Ḍumkạ                                            So̱ho̱r                                        Toa

1.Dumkạ do̱ lạṭu so̱ho̱r kana.
2.Noa do̱ jạrsi gại toa kana.
3. Bahamuni do̱e cecet̕dại kana.
4. Bo̱ko̱ń do̱ poesae at̕keda.
5. Iń dại do̱le baplakedea.
6. Lumti kuṛi do̱ bho̱jko jo̱mkeda.
7.Sisir dak̕te hoṛoko lo̱ho̱t̕akana.
8. Noa pho̱ṭogạḍi aleak̕kana.
9.Gaḍa reak̕ dak̕ riṛim riṛim ńe̱lo̱k̕kana.
10. Kiminte̱t̕ do̱ sona pagarae ho̱ro̱k̕akada.

4.Ńunum की परिभाषा संताली में लिखें । 
5. संताली व्याकरण में ńunum के भेद बताए गए हैं ? प्रत्येक भेद को उदाहरण के साथ बताएं । 
                 सही चिन्ह (✓) लगाकर उत्तर दें :
6. e̱ho̱p̕ क्रिया से n̕unum निम्न में से  कौन -सा होगा ?

 (a)   e̱po̱ho̱p (b) e̱tp̱ho̱p̕ (c) e̱no̱ho̱p̕  (d) e̱so̱ho̱p̕
 
7. ạcur   क्रिया से n̕unum निम्न में से  कौन -सा होगा ?
 
  (a) ạpạcur (b)  ạcạcur (c) ạnạcur (d) acạnur
 
8.  sare̱c̕ क्रिया से ńunum  कौन सा होगा ?

 (a) sapare̱c̕  (b) satare̱c̕ (c) sakare̱c̕ (d) sanare̱c̕
 
9. rakap̕ क्रिया से ńunum  कौन सा होगा ?
 
 (a)rapakap̕  (b) ranakap̕ (c) rapapak̕  (d) ranatap̕
 
10.  oasar विशेषण से  ńunum  कौन सा होगा ?
 
(a) o̱po̱sar (b) o̱no̱sar  (c) o̱psar (d) o̱nsar
 
11.sikup̕ क्रिया से ńunum  कौन सा होगा ?
 
 (a)  sinikup̕ (b) sipikup̕ (c) sipkup̕ (d) sisikup̕
 
12.  suḍur क्रिया से ńunum  कौन सा होगा ?
 
 (a) suḍuḍur  (b) subuḍur  (c) sunuḍur    (d) soboḍor
 
 
 Lekha (वचन )-Number
 
 

Lekha ( वचन) संताली  व्याकरण का एक महत्वपूर्ण घटक है जो संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, और क्रिया के रूप में संख्या के आधार पर बदलाव को दर्शाता है। Lekha (वचन) का अर्थ है "संख्या" या "संख्यात्मक रूप," और यह बताता है कि किसी शब्द का संबंध कितने व्यक्तियों, वस्तुओं, या घटनाओं से है। संताली  में Lekha (वचन के) तीन के  प्रकार होते हैं:

  1. Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular)
  2. Bar Lekha द्विवचन (Dual Number)
  3. Saṅge Lekha -बहुवचन (Plural)

1.Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular) :

Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular) का अर्थ है "एक संख्या" यानी जब किसी शब्द का उपयोग केवल एक ही व्यक्ति, वस्तु, स्थान, या घटना का बोध कराने के लिए किया जाता है, तो उसे

Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular) कहा जाता है।

Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular)  शब्द यह दर्शाता है कि संज्ञा या सर्वनाम की संख्या केवल एक है।

संताली व्याकरण में,Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular) का उपयोग तब होता है जब हम किसी एक चीज़ या व्यक्ति के बारे में बात कर रहे हों। इसका मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि चर्चा का विषय केवल एक ही है और यह अकेला है, न कि किसी समूह का हिस्सा।

Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular)  के उदाहरण:

Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular) के अंतर्गत वे सभी संज्ञाएँ, सर्वनाम, या क्रियाएँ आती हैं जो केवल एक ही वस्तु, व्यक्ति, या घटना का बोध कराती हैं। कुछ सामान्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:

  1. ńunum के उदाहरण:

    • koṛa: यहाँ एक ही लड़के का जिक्र हो रहा है।
    • puthi: केवल एक ही किताब की बात की जा रही है।
    • seta: एक ही कुत्ते का उल्लेख है।
    • dare: एक ही पेड़ का जिक्र हो रहा है।
  2. ujnum के उदाहरण:

    • uni: यह एक व्यक्ति या वस्तु के लिए प्रयोग होता है।
    • nui: किसी एक निकटवर्ती वस्तु का बोध कराता है।
  3. gunum के उदाहरण:

    • cerha kuṛi: यहाँ एक ही लड़की की सुंदरता की बात की जा रही है।
    • lạṭu oṛak̕: केवल एक बड़े घर का जिक्र हो रहा है।
  4. kạjnum के साथ एकवचन का प्रयोग:

    • dạṛet̕kanae: 'e' एकवचन है, इसलिए क्रिया 'dạṛet̕kanae' का प्रयोग किया गया है।
    • calak̕kanakin: 'kin' द्विवचन होने के कारण ' calak̕ kanakin' का प्रयोग किया गया है।
    • jo̱me̱t̕ kanako: "ko" बहुवचन होने के कारण "jo̱me̱t̕ kanako" का प्रयोग किया गया है।

      Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular)

Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular) शब्दों की पहचान के नियम:

Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular) शब्द का प्रयोग तब होता है जब बात किसी एक वस्तु, व्यक्ति, स्थान, या घटना की हो रही हो ।

  • संताली में, Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular) शब्द के अंत में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता, जैसे "koṛa," "puthi," आदि । ये सीधे तौर पर एक संख्या को दर्शाते हैं। लेकिन संताली में वाक्य प्रयोग में जब शब्दों को प्रयोग किया जाता है, तो वही शब्द पद बनकर  पुरुष और वचन के अनुसार रूप परिवर्तन होती है यानि अन्विति होती है ।  संताली में सर्वनाम दो रूप में प्रयोग  होता है , एक विस्तार रूप दूसरा संक्षिप्त रूप । और यह रूप , प्राणिवाचक  एवं  अप्राणिवाचक  के अनुसार परिवर्तित होती है

    जैसे : (प्राणिवाचक सार्वनामिक  एकवचन) विस्तार रूप- iń,am,uni,nui,hạni,huni,ni,ini,hini,ạni,nũk̕ui,nik̕i,nhạ̃i,nhui,nhi,nhũk̕ũi, nhĩk̕ĩ,nhạ̃k̕ãi,ahại,un-uni,un-unkin,in-ini,o̱ne̱-uni,o̱no̱-uni,o̱ne̱-ini,hane̱-hạni,nũk̕ũi-ni,nhũk̕ũi-nhĩ,nhũk̕ũi-nhũi,nhũk̕ũi-nui.

    .

    अप्राणिवाचक सार्वनामिक  एकवचन  -noa,ona,hana,niạ,inạ,hinạ,hana,nõk̕õe,nhãwã,nhoa,nhia̱,nhõ̱k̕õ̱e,nhãk̕ãe,o̱n-o̱na,o̱n-o̱ne,,,e̱n-e̱ne̱,he̱n-he̱ne̱,,han-hane̱,o̱ne̱-inạ,o̱ne̱-ona, o̱ne̱-inạ,o̱ne̱-hinạ,o̱ne̱-inạ,he̱ne̱-hinạ,hane̱-hana,hane-hana,nõ̱k̕õ̱e-noa.

    संक्षिप्त रूप-(प्राणिवाचक सार्वनामिक  एकवचन): - e,i,ye,m,ń,me. इसे संताली के baseword में एकवचन बनाने के लिए एकवचन प्रत्यय के रूप में कार्य करते हैं ।


    वाक्य प्रयोग द्वारा संक्षिप्त रूप को नीचे समझाया गया यही :

    e - Unie calak̕kana.

    i - Bạhu ạgui calaoakana.

    ye -Ḍaṅgra ạguiye calaoakana.

    m- Dakam jo̱mkeda ?

    ń- Ḍukkạ gapa calak̕a.

    me- do calak̕me .

    प्राणिवाचक सर्वनाम तथा संबंधवाचक सर्वनाम के  एकवचन का  संक्षिप्त रूप:-tiń,tam,tae.

    वाक्य प्रयोग द्वारा संक्षिप्त रूप को नीचे समझाया गया यही :

    tiń- Ko̱lo̱m ạguitińme.

    tam- Tabe̱n lo̱ho̱dtam.

    tae- Gamcha ạguitam.

     Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular) शब्दों के साथ प्रयोग होने वाली क्रिया भी Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular) रूप में होती है, जैसे "unie gatek̕kana," "uni kuṛie kạmikana।"

Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular) का व्याकरणिक महत्व:

व्याकरण में,Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular) का सही उपयोग भाषा की सटीकता को बनाए रखने में मदद करता है। यह सुनिश्चित करता है कि जब हम एक व्यक्ति या वस्तु की बात कर रहे हैं, तो संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, और क्रिया का स्वरूप भी उसी के अनुरूप हो। इससे वाक्य का अर्थ स्पष्ट रहता है और संचार में कोई भ्रम नहीं होता।

Mit̕ Lekha-एकवचन (Singular), Bar Lekha द्विवचन (Dual Number) और  Saṅge Lekha -बहुवचन (Plural) का अंतर:

    • Mit̕ Lekha : केवल एक वस्तु, व्यक्ति, या घटना का बोध कराता है।

    • उदाहरण: "Koṛae calak̕ kana।" (यहाँ केवल एक लड़का  की बात हो रही है)
    • Bar Lekha: दो  वस्तुओं, व्यक्तियों, या घटनाओं का बोध कराता है।

    •  Saṅge Lekha : एक से अधिक वस्तुओं, व्यक्तियों, या घटनाओं का बोध कराता है।

      Bar Lekha द्विवचन (Dual Number)शब्द का प्रयोग तब होता है जब बात किसी दो वस्तु, व्यक्ति, स्थान, या घटना की हो रही हो ।

       

      2.Bar Lekha द्विवचन (Dual Number)

      Bar Lekha द्विवचन (Dual Number) शब्दों की पहचान के नियम:

       संताली में, Bar Lekha द्विवचन (Dual Number) शब्द के अंत में  परिवर्तन  होता, जैसे "koṛa -kin=korakin," "puthikin," आदि । ये सीधे तौर पर दो संख्या को दर्शाते हैं। लेकिन संताली में वाक्य प्रयोग में जब शब्दों को प्रयोग किया जाता है, तो वही शब्द पद बनकर  पुरुष और वचन के अनुसार रूप परिवर्तन होती है यानि अन्विति होती है ।  संताली में सर्वनाम दो रूप में प्रयोग  होता है , एक विस्तार रूप दूसरा संक्षिप्त रूप । और यह रूप , प्राणिवाचक  एवं  अप्राणिवाचक  के अनुसार परिवर्तित होती है ।

जैसे : 

(प्राणिवाचक सार्वनामिक द्विवचन) विस्तार रूप- ạliń,aben,unkin,nukin,hạnkin,hunkin,nikin,inkin,hinkin,ạnkin,,nhạ̃kin,nhukin,nhikin , nhĩkin,,un-unkin,in-inkin,o̱ne̱-unkin,o̱no̱-unkin,o̱ne̱-inkin,hane̱-hạnkin,,nhikin.

 

  संक्षिप्त रूप-(प्राणिवाचक सार्वनामिक द्विवच) : -liń,laṅ,ben,kin,tạliń,talaṅ,taben,tạkin. इसे संताली के baseword में द्विवचबनाने के लिए द्विवच प्रत्यय के रूप में कार्य करते हैं ।

प्राणिवाचक सर्वनाम तथा संबंधवाचक सर्वनाम के द्विवचका  संक्षिप्त रूप:-tạliń,taben,tạkin,talaṅ.

 अप्राणिवाचक सार्वनामिक द्विवचन-noakin,onakin,hanakin,niạkin,inạkin,hinạkin,hana,nõk̕õekin,

nhãwãkin,nhoakin,nhia̱kin,nhõ̱k̕õ̱ekin, ,nhãk̕ãekin,o̱n-o̱nkina,o̱n-o̱nakin,han-hane̱kin,o̱ne̱-inạkin,ona-o̱ne̱kin,o̱ne̱-onakin,,,o̱ne̱-inạkin,o̱ne̱-hinạkin,o̱ne̱-inạkin,,he̱ne̱-hinạkin,hane̱-hanakin,hane-hanakin,,,nõ̱k̕õ̱e-noakin,

3.Saṅge Lekha -बहुवचन (Plural) :

जब किसी शब्द का उपयोग एक से अधिक व्यक्तियों, वस्तुओं या घटनाओं के लिए किया जाता है, तो उसे बहुवचन कहा जाता है। बहुवचन शब्द यह दर्शाता है कि संख्या में एक से अधिक हैं।

उदाहरण:

  • koṛako (कई लड़के)
  •  puthiko(कई पुस्तकें)
  • setako (कई कुत्ते)

Lekha (वचन) परिवर्तन के नियम:

संताली में, एकवचन से द्विवचन और बहुवचन में बदलने के लिए कुछ सामान्य नियम हैं, संताली शब्दों के साथ वचन और पुरुष साथ- साथ  प्रयोग होता वाक्यों के पदों में, वचन और पुरुष एक दूसरे के बिना प्रयोग नहीं हो सकता । एक दूसरे के पूरक हैं:

यदि हम पुरुष और वचन में से किसी एक को छोड़ दें तो , वाक्य अशुद्ध होगा । 

उदाहरण देखें : 

1.Uni do̱ daka jo̱met̕ kana.(अशुद्ध )

    Uni do̱ dakae jo̱met̕kana. (शुद्ध)

2. Ram do̱ kạk̕mikana. (अशुद्ध)

    Ram do̱e kạk̕mikana.(शुद्ध)

3.Sam Pargana do̱ Paderkolaren tahẽ̱kana.(अशुद्ध)

    Sam Pargana do̱e Paḍerkolarenkana. (शुद्ध)

संताली में एकवचन पुरूषवाचक सर्वनाम का संक्षिप्त रूप वाक्य के क्रियापदबंध के ठीक पूर्व में आने वाले शब्दों में प्रत्यय के रूप में जुड़ जाती हैं । वाक्य संख्या 1,2,3 में रेखांकित और नीली रंगों वाली वाक्यांश क्रियापदबंध हैं । उनके पूर्व वाली शब्द, जो लाल रंग से रंजित हैं , उसमें  short form of personal number का प्रयोग नहीं हैं,  जो व्याकरणिक रूप से अशुद्ध  हैं । वाक्य के आरंभ में प्रयुक्त कर्ता (Subject) संज्ञा और सर्वनाम है ।  जैसे : Uni,Ram, Sam Pargana एकवचन है , इसलिए इनके साथ एकवचन पुरूषवाचक सर्वनाम का संक्षिप्त रूप "e" का प्रयोग होना चाहिए ।

प्राणिवाचक सार्वनामिक बहुवचन) विस्तार रूप-

abo,abon,ale,ape,onko,noko,hạnko,,niko,inko,hinko,ạnko,,nhạ̃ko,nhoko,nhiko , on-onko,in-inko,o̱ne̱-unko,o̱no̱-onko,o̱ne̱-inko,hane̱-hạnko,,nhiko,inile,inipe,iniko,enko,unile,unipe,onko,uniko,hunile,

hunipe,honko,huniko,hinile,hinipe,hinko,henko,nhạile,

nhạipe,nhạko,ạnile,ạnipe,ạniko,hạnile,hạnipe,hanko,hạniko.

संक्षिप्त रूप-(प्राणिवाचक सार्वनामिक  बहुवचन ): - 

 bo,bon,le,ko,pe. इसे संताली के baseword में बहुवचन बनाने के लिए बहुवचन प्रत्यय के रूप में कार्य करते हैं ।

प्राणिवाचक सर्वनाम तथा संबंधवाचक सर्वनाम के बहुवचन का  संक्षिप्त रूप:-tale,tako,tape, tabo,tabon.

 

 

 अप्राणिवाचक सार्वनामिक बहुवचन-

noako,onako,hanako,niạko,inạko,hinạko,hanako,nhãwãko,nhoako,nhia̱ko,nhõ̱k̕õ̱eko, ,nhãk̕ãeko,o̱n-o̱nko,o̱n-o̱nako,han-hane̱ko,o̱ne̱-inạko,ona-o̱ne̱ko,o̱ne̱-onako,o̱ne̱-inạko,o̱ne̱-hinạko,o̱ne̱-inạko,,he̱ne̱-hinạko,hane̱-hanako,hane-hanako,,,nõ̱k̕õ̱e-noako,


वचन का प्रभाव क्रिया पर भी होता है । एकवचन, द्विवचन और बहुवचन के अनुसार क्रिया का रूप बदलता है। उदाहरण के लिए:

  • E̱ne̱c̕ kanae - (एकवचन)
  • E̱ne̱c̕ kanakin -(द्विवचन)
  •  E̱ne̱c̕ kanako - (बहुवचन)

संक्षेप में:

Lekha (वचन) भाषा के संख्यात्मक स्वरूप को दर्शाने का तरीका है, जिससे यह पता चलता है कि बात एक व्यक्ति/वस्तु की हो रही है या अनेक की। यह भाषा की संरचना को स्पष्ट और सटीक बनाता है।


 
 
 
                                                                                                                                                                                                                 
 
        



































































































































































































































































































































































































































































































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शब्द-भेद   

Sabad Hạṭiń

(Parts of Speech)


  संताली  और अन्य भाषाओं में शब्दों को उनके कार्य, उपयोग, और वाक्य में स्थान के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बाँटा जाता है। यह भाषा की संरचना को समझने और सही ढंग से उपयोग करने में सहायक होते हैं। संताली में शब्द-भेद के मुख्य रूप से आठ प्रकार होते हैं, जिन्हें निम्नलिखित प्रकार से समझाया जा सकता है ।

''Sabad Hạṭiń''  को हिन्दी में  ''शब्द-भेद''  और अंग्रेजी में इसे ''Parts of Speech'' कहते हैं । 

1. Ńunum-संज्ञा (Noun)

Ńunum (संज्ञा) उस शब्द को कहते हैं, जिससे किसी व्यक्ति, स्थान, वस्तु, भाव, या गुण का बोध हो। ''Ńunum''  को हिन्दी में  ''संज्ञा''  और अंग्रेजी में इसे ''Noun'' कहते हैं । 

उदाहरण:

  • Ram iskule calak̕kana -राम स्कूल जा रहा है। (Ram= व्यक्ति है । )
  • Noa puthi ạḍi mo̱ńja-यह पुस्तक बहुत अच्छी है। ( puthi = वस्तु है ।)
  • Dilli do̱ bharo̱t reak̕  rajdhanikana -दिल्ली भारत की राजधानी है। (Dilli = स्थान है ।)

2. Ujnum-सर्वनाम (Pronoun)

Ujnum (सर्वनाम) वह शब्द है जो संज्ञा की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए संज्ञा के स्थान पर आता है। ''Ujnum''  को हिन्दी में  ''सर्वनाम''  और अंग्रेजी में इसे ''Pronoun'' कहते हैं । 

उदाहरण:

  • Uni do̱ iskule calak̕kana-वह स्कूल जा रहा है। (Uni = Ram के स्थान पर प्रयोग हुआ है)
  • Iń gapa oṛak̕iń calak̕a-मैं कल घर  जाऊँगा। (Iń = बोलने वाला व्यक्ति)

3. Gunum-विशेषण (Adjective)

Gunum (विशेषण) वह शब्द होता है जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता, गुण, संख्या, या परिमाण को बताता है। ''Gunum''  को हिन्दी में  'विशेषण' और अंग्रेजी में इसे''Adjective'' कहते हैं । 

उदाहरण:

  • Noa arak̕ puthi ińak̕kana- यह लाल किताब मेरी है। (arak̕ = रंग का गुण)
  • Ram ạḍi tạpise dạṛet̕kana-राम बहुत तेज दौड़ता है। (tạpis = Ram की विशेषता बताता है ।)

4.Kạjnum- क्रिया (Verb)

Kạjnum (क्रिया ) वह शब्द है जो किसी कार्य, अवस्था या घटना का बोध कराता है।''Kạjnum''  को हिन्दी में  ''क्रिया' और अंग्रेजी में इसे ''Verb'' कहते हैं । 

उदाहरण:

  • Rame gatek̕kana -राम खेल रहा है। (gatek̕ = कार्य हो रहा है । )
  • Uni gitic̕kana-वह सो रहा है। (gitic̕= अवस्था)

5.Kạjnum-Gunum (क्रिया-विशेषण) (Adverb)

Kạjnum-Gunum (क्रिया-विशेषण) वह शब्द होता है जो क्रिया, विशेषण, या अन्य क्रिया-विशेषण की विशेषता को बताता है। ''Kạjnum-Gunum''  को हिन्दी में  ''क्रिया-विशेषण' और अंग्रेजी में इसे ''Adverb'' कहते हैं । 

उदाहरण:

  • Uni raṅgaotey dạṛet̕a-वह तेज़ी से दौड़ता है। ( raṅgaote= क्रिया "dạṛ" की विशेषता  बताता है । )
  • Uni ạḍie cerhawa-वह बहुत सुंदर है। (ạḍi= विशेषण  'cerha' की विशेषता बताता है । )

6. Sombaond Lạlạiak̕-संबंधबोधक (Preposition)

संबंधबोधक वे शब्द होते हैं जो संज्ञा या सर्वनाम का अन्य शब्दों से संबंध बताते हैं। ''Sombaond Lạlạiak̕''  को हिन्दी में  ''संबंधबोधक' और अंग्रेजी में इसे ''Preposition'' कहते हैं । 

उदाहरण:

  • किताब टेबल पर रखी है। (पर = स्थान का संबंध)
  • मैं स्कूल के पास रहता हूँ। (के पास = स्थान का संबंध)

7.Joṛao- समुच्चयबोधक (Conjunction)

Joṛao (समुच्चयबोधक) वे शब्द होते हैं जो दो या अधिक शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को आपस में जोड़ते हैं ।''Joṛao''  को हिन्दी में ''समुच्चयबोधक''और अंग्रेजी में इसे ''Conjunction'' कहते हैं । 

उदाहरण:

  • Ram ar Lokho̱ntakinkin gatek̕kana -राम और लक्षमण खेल रहे हैं। (ar = दो व्यक्तियों को जोड़ रहा है)
  • Iń do̱ń paṛhaok̕a cedak̕ etne bidạu sorakana.-मैं पढ़ूँगा क्योंकि परीक्षा निकट है। cedak̕ etne = कारण और परिणाम को जोड़ रहा है)

8. Rạskạ, duk-bhabna {विस्मयादिबोधक (Interjection}

विस्मयादिबोधक वे शब्द होते हैं जो किसी Bhao, hahaṛa, rạskạ, duk-bhabna (भाव, आश्चर्य, खुशी, दुख) आदि को प्रकट करते हैं .''Rạskạ, duk-bhabna''  को हिन्दी में ''विस्मयादिबोधक''और अंग्रेजी में इसे ''Interjection'' कहते हैं । 

उदाहरण:

  • Bah (वाह)! तुमने बहुत अच्छा काम किया। ( Bah= खुशी और प्रशंसा प्रकट होता है )
  • Haere (अरे)! तुम यहाँ कैसे आ गए? ( Haere= आश्चर्य व्यक्त करता है )

व्याख्या:

शब्द-भेद किसी भी भाषा को सही ढंग से समझने और लिखने में मदद करते हैं। इन श्रेणियों के माध्यम से हम यह पहचान सकते हैं कि किसी वाक्य में कौन-सा शब्द किस उद्देश्य से उपयोग किया गया है। Ńunum(संज्ञा) किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थान को बताती है, जबकि Ujnum (सर्वनाम) इसे बदलने का काम करता है। Gunum (विशेषण) और Kạjnum-Gunum (क्रिया-विशेषण) शब्दों को और विस्तार से समझाते हैं। Kạjnum(क्रिया) कार्य या अवस्था को इंगित करती है, ''ar'' Jorạo (समुच्चयबोधक) शब्दों को जोड़ने का कार्य करता है।Rạskạ, duk-bhabna (विस्मयादिबोधक ) शब्द सीधे भावनाओं को व्यक्त करने में सहायक होते हैं।

यह वर्गीकरण भाषा को सही ढंग से लिखने, पढ़ने और समझने में बहुत महत्वपूर्ण है।

Ńunum {संज्ञा (Noun)}:

Ńunum { (संज्ञा (Noun)}: संज्ञा शब्दों का वह वर्ग है, जो किसी ho̱ṛ ,jaega se̱ ṭhạ̃i ,jinis,gun, bhao, kạmi (व्यक्ति, स्थान, वस्तु, गुण, भाव, कार्य ) आदि का नाम बताने के लिए प्रयुक्त होता है। इसे संताली में 'Ńunum' , हिन्दी में 'संज्ञा' और   अंग्रेज़ी में  'Noun' कहा जाता है।

  वह शब्द जो किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, गुण, भाव या विचार का नाम बताता है । यह भाषा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो किसी चीज़ या व्यक्ति की पहचान करता है और इसे ही संज्ञा कहते हैं ।

Ńunum reak̕ Hạṭiń (संज्ञा के प्रकार):

  1. Ńutum Lạlạiak̕ Ńunum {व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun)}:

    • इसका प्रयोग किसी विशेष ho̱ṛ ,jaega se̱ ṭhạ̃i ,jinis , sãota (व्यक्ति, स्थान, वस्तु, या संस्था) के नाम के रूप में होता है।
    • उदाहरण:
      • व्यक्ति: Ram,chitạ, Lo̱kho̱n, Likhi (राम, सीता,लक्षमण ,लुखी  )
      • स्थान: Dilli, Pạriạṛ ,Ḍumkạ, Amṛạpaṟa, Himalo̱e Buru (दिल्ली, परियारदाहा, दुमका,अमड़ापाड़ा,हिमालय)
      • वस्तु: Basnại Gaḍa , Gaṅ Nại, Yamuna Gaḍa (बासलोई नदी ,गंगा नदी, यमुना नदी)
       
      परिभाषा:  किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु के  नाम को Ńutum Lạlạiak̕ Ńunum कहते हैं इसे संताली में 'Ńutum Lạlạiak̕ Ńunum' , हिन्दी में 'व्यक्तिवाचक संज्ञा'  और   अंग्रेज़ी में  'Proper Noun' कहा जाता है।
       
  2. Jạt Lạlạiak̕ Ńnuum{जातिवाचक संज्ञा (Common Noun)}:

    • इसका प्रयोग किसी ho̱ṛ (व्यक्ति), jinis (वस्तु) या (jaega se̱ ṭhạ̃i) स्थान की सामान्य जाति या समूह को बताने के लिए होता है।
    • उदाहरण:
      • व्यक्ति: Koṛa (लड़का), (kuṛi) लड़की, (ho̱ṛ) आदमी,cẽ̱rẽ̱ (पक्षी)
      • स्थान: So̱ho̱r Bajar,Nagraha ,Gaḍa ,Buru (शहर, नगर ,नदी, पहाड़)
      • वस्तु: Puthi,me̱j, Oṛak̕ (किताब, मेज़,घर ) 
       
      परिभाषा:  एक ही प्रकार की वस्तुओं, व्यक्तियों या स्थानों के समूह का सामान्य नाम को Jạt Lạlạiak̕ Ńnuum कहते हैं इसे संताली में 'Jạt Lạlạiak̕ Ńnuum' , हिन्दी में 'जातिवाचक संज्ञा '  और   अंग्रेज़ी में  'Common Noun' कहा जाता है।
       
  3. Ḍhạo Lạlaiak̕ Ńunum{भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun)}:

    • इसका प्रयोग किसी bhao (भाव),gun (गुण), o̱bo̱sta (अवस्था), या (kạmi) कार्य का नाम बताने के लिए होता है। यह संज्ञा उन चीजों का नाम होता है जिन्हें हम देख या छू नहीं सकते, केवल महसूस कर सकते हैं।
    • उदाहरण:
      • भाव: dulạṛ,ghinạhi-hirkhạ,rạskạ,duk(प्रेम, घृणा, खुशी, दुःख )
      • गुण: mo̱ńte̱t̕,cehratet̕,sạhạ̃s (अच्छाई, सुंदरता, साहस)
      • अवस्था:gidṛbạsite̱t̕,haṛamte̱t̕,juạnte̱t̕ (बचपन, बुढ़ापा लड़कपन )
      • कार्य: paṛhao,jo̱mak̕, ạkil sereń,e̱ne̱c̕,o̱no̱l,panaṛhao, benao (अध्ययन, भोजन, शिक्षा ,गायन ,लेखन ,वाचन ,निर्माण )
       1. sereń{ गायन (गाना का कार्य)}
      2. e̱ne̱c̕ { नृत्य (नाचने का कार्य)}
      3.
      o̱no̱l{ लेखन (लिखने का कार्य)}
      4.
      paṛhao{ वाचन (पढ़ने का कार्य)}
      5. निर्माण {(बनाने का कार्य)}
     Ḍhạo Lạlaiak̕ Ńunum: यह वह संज्ञा होती है, जो किसी भाव, गुण, अवस्था, या क्रिया का नाम बताने के लिए प्रयोग होती है। इस प्रकार की संज्ञा अमूर्त होती है, जिसका अनुभव तो किया जा सकता है, लेकिन जिसे हम अपनी इंद्रियों से देख या छू नहीं सकते ।  

    4. Ḍhạo Lạlaiak̕ Ńunum की परिभाषा:

    "वह संज्ञा जो किसी भावना, गुण, स्थिति, अवस्था या क्रिया का बोध कराती है और जिसे केवल अनुभव किया जा सकता है, उसे Ḍhạo Lạlaiak̕ Ńunum कहते हैं।"Ḍhạo Lạlaiak̕ Ńunum '' , हिन्दी में 'भाववाचक संज्ञा'  और   अंग्रेज़ी में  'Abstract Noun' कहा जाता है। 


    Durib Ńunum {द्रव्यवाचक संज्ञा (Material Noun)}

 Durib Ńunum वह संज्ञा होती है, जो किसी द्रव्य, पदार्थ या उस सामग्री का बोध कराती है, जिससे वस्तुएँ बनती हैं। यह संज्ञा ठोस, द्रव या गैसीय किसी भी प्रकार के पदार्थ को संदर्भित कर सकती है, जिसे मापा, तौला या देखा जा सकता है, लेकिन गणना नहीं की जा सकती। द्रव्यवाचक संज्ञा का उपयोग उन सामग्रियों के लिए होता है जिनसे कोई चीज बनाई जाती है, जैसे sona (सोना), dak̕ (पानी), kaṭ (लकड़ी), toa (दूध),sunum (तेल)  ,guhum (गेहूं) ,caole (चावल)  आदि।

उदाहरण:

  1. sona(सोना): इस आभूषण को बनाने में sona(सोना) प्रयोग हुआ है।

    • sona(सोना) एक धातु है जिससे आभूषण बनते हैं।
  2. dak̕ (पानी): इस झील में बहुत सारा dak̕(पानी) है।

    • dak̕ (पानी) एक तरल पदार्थ है ।
  3. toa(दूध): यह बच्चा रोज़ toa(दूध) पीता है ।

    • toa(दूध) एक द्रव्य पदार्थ है ।
  4. kaṭ (लकड़ी): इस मेज़ को बनाने के लिए kaṭ (लकड़ी) का प्रयोग किया गया है।

    • kaṭ (लकड़ी) एक ठोस पदार्थ है।
  5. kasko̱m(कपास): यह कपड़ा शुद्ध kasko̱m(कपास) से बना है।

    • kasko̱m (कपास) एक प्राकृतिक सामग्री है।

विशेषताएँ:

  1. गणना नहीं की जा सकती: द्रव्यवाचक संज्ञा अगणनीय संज्ञा भी कहते हैं ।  इसको इकाईयों में नहीं गिना जा सकता। उदाहरण के लिए, हम "एक सोना" या "एक पानी" नहीं कह सकते। इन्हें मापने के लिए हम "किलोग्राम से सोना" या "लीटर से पानी" जैसे माप का उपयोग करते हैं।

  2. सामग्री या पदार्थ: यह किसी भी वस्तु को बनाने वाली मूल सामग्री या पदार्थ को व्यक्त करती है।

इस प्रकार, द्रव्यवाचक संज्ञा उन सामग्रियों का नाम बताती है, जिनसे दूसरी वस्तुएँ बनती हैं।

उदाहरण: sona, cạndi, mẽṛhe̱t̕,dak̕,sunum,kasko̱m( सोना, चांदी, लोहा, पानी, तेल, कपास) ।
 
परिभाषा: वह संज्ञा जो किसी पदार्थ, सामग्री या द्रव्य का नाम बताती है, जिससे कोई वस्तु निर्मित होती है, उसे 'Durib Ńunum' कहते हैं।" इसे संताली में 'Durib Ńunum' , हिन्दी में 'द्रव्यवाचक संज्ञा'  और   अंग्रेज़ी में  'Material Noun' कहा जाता है।
 
 
Do̱l Ńunum {समूहवाचक संज्ञा (Collective Noun)}:
 
Do̱l Ńunum{समूहवाचक संज्ञा (Collective Noun)} वे संज्ञाएँ होती हैं जो व्यक्तियों, वस्तुओं या प्राणियों के समूह का बोध कराती हैं। यह किसी एक व्यक्ति या वस्तु का नाम न होकर एक साथ कई व्यक्तियों या वस्तुओं के समूह को प्रकट करती हैं।

उदाहरण सहित व्याख्या:

  1. Palṭo̱n (सेना)- यह एक समूहवाचक संज्ञा है, जो कई सैनिकों के समूह को व्यक्त करती है।

    • उदाहरण:Palṭo̱n (सेना) ने दुश्मनों को पराजित किया।
  2. Do̱l (झुंड) - पक्षियों, जानवरों, या किसी और चीज़ों के समूह के लिए प्रयोग किया जाता है।

    • उदाहरण: पक्षियों का Do̱l (झुंड) आसमान में उड़ रहा था।
  3. Do̱l (मंडली) - यह संज्ञा लोगों के समूह को व्यक्त करती है, विशेष रूप से कलाकारों या संगीतकारों की।

    • उदाहरण: संगीतकारों की Do̱l (मंडली) ने सुंदर प्रस्तुति दी।
  4. do̱l (दल) - किसी कार्य या उद्देश्य के लिए बने समूह के लिए प्रयोग होती है।

    • उदाहरण: राजनीतिक दल चुनाव की तैयारी कर रहा है।
  5. Bhiṛ (टोली) - बच्चों या लोगों के छोटे समूह के लिए यह शब्द इस्तेमाल किया जाता है।

    • उदाहरण: बच्चे अपनी टोली के साथ खेल रहे थे।
    • इसका प्रयोग किसी समूह, झुंड, या टोली को व्यक्त करने के लिए होता है।
    • उदाहरण: भीड़, सेना, झुंड, दल, पुस्तकालय

      परिभाषा:

      Do̱l Ńunum  वह संज्ञा है, जो ho̱ṛko  (व्यक्तियों), jinosko  (वस्तुओं), या janwarko  (प्राणियों) के समूह को प्रकट करती है।" इसे संताली में 'Do̱l Ńunum ' , हिन्दी में 'समूहवाचक संज्ञा'  और   अंग्रेज़ी में  'Collective Noun' कहा जाता है।

उदाहरणों के साथ स्पष्टीकरण:

  1. Ram राम (Ńutum Lạlạiak̕ Ńunum): यह एक विशेष व्यक्ति का नाम है।
  2. So̱ho̱r शहर (Jạt Lạlạiak̕ Ńnuum): यह किसी भी So̱ho̱r (शहर) का सामान्य नाम है।
  3. Dulạṛ {प्रेम (Ḍhạo Lạlaiak̕ Ńunum)}: यह एक भावना का नाम है।
  4. Sona सोना (Durib Ńunum ): यह एक धातु है जिसका प्रयोग आभूषण बनाने में होता है।
  5. Palṭo̱n {सेना (Do̱l Ńunum)}: यह सैनिकों के समूह को दर्शाती है।

Ńunum (संज्ञा) के प्रयोग के कुछ वाक्य:

  1. Ram राम (Ńutum Lạlạiak̕ Ńunum)- रोज़ स्कूल जाता है।
  2. So̱ho̱r शहर (Jạt Lạlạiak̕ Ńnuum)- So̱ho̱r (शहर) में बहुत शोर होता है।
  3. Dulạṛ प्रेम (Ḍhạo Lạlaiak̕ Ńunum)- Dulạṛ (प्रेम) सबसे महान भावना है।
  4. Sona {सोना (द्रव्यवाचक)}- Sona (सोना) महंगा होता है।
  5. Palṭo̱n सेना (Do̱l Ńunum)- Palṭo̱n (सेना)देश की रक्षा करती है।

संज्ञा भाषा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि यह jinisko (वस्तुओं), ho̱ṛko (व्यक्तियों} और bhao (भावनाओं) को नाम देकर संचार को स्पष्ट और सार्थक बनाती है।

 

Worked out ( हल किया हुआ उदाहरण ) :


  • Cet̕ am gapam calak̕a ?         -Kukli
  • Gapa do̱ iń Ḍumkạń calak̕a.      - Mela ayat
  • Haere ! ạdị mo̱ńj sạṛitae.      - Hahaṛ-rạskạ-bhabna-duk ayat
  • Ko̱lo̱m sabme ar do̱ iskul calak̕me.     -Hukum
  • Aema bo̱cho̱r jivedo̱k̕me baṛe̱       -Hukum
  • Noa dare do̱ ạḍi maraṅa.       -Mela ayat
  •  Tinạk̕ tel sãwãr koṛakanae     -Hahaṛ-rạskạ-bhabna-duk ayat
  • Noa daka do̱ reaṛgea.      -Mela ayat
  • Iń lạgit̕em kạmikea ?     -Hukum
  • Do calak̕me.       -Hukum
  • Sạt go̱dme.      -Hukum
  • Is ! jạnumiń ro̱k̕ena      -Hahaṛ-rạskạ-bhabna-duk ayat
  • Ọh -ọh ! alom laga,laḍu nahãk̕ babae ạguama.      -Hahaṛ-rạskạ-bhabna-duk ayat
  • Isre ! deań jo̱sena.      -Hahaṛ-rạskạ-bhabna-duk ayat
  • Do amge bare̱ ̣̣calak̕me.    -Hukum
 
 
Ạkil Bhańjao (अभ्यास) 
1. इनमें से प्रत्येक वाक्य  के  बारे में बताएं कि वह किस प्रकार का वाक्य है :
Pạrtulko (उदाहरण): 
  • Dạṛme ar arhọ̃ dạr ruạrme.- -Hukum
  • Do daka jo̱mlem. - -Hukum
  • Ce̱t̕em cek̕kakana ?--Kukli
  •  Noa do̱ bạric̕gea.-Mela ayat 
1. Teheń gapa do̱ ạḍi bese dak̕abonkana.
2. Piprạ ato do̱ Tereltola kho̱n tinạk̕ sạṅgińa ?
3.Haere ! tinak̕ bọtọran birbão hijuk̕kana.
4. Do̱ dạṛ dạṛ họe dak̕ he̱c̕ se̱ṭe̱rena.
5. Sidạ holagey benḍaoena, uniak̕ atma je̱mo̱n sạntie nám .
6.Sidạ Kạnhũ lạṛhaire pase̱c̕ 10 hajar gan ho̱ṛko iṅgrạj ṭhe̱nko ṭhu go̱c̕ ocoeyna.
7. Sadạ Kạnhũ do̱ o̱ko̱ekin tahẽ̱kana?
8. No̱ṇḍe̱ do̱ cet̕pe ńamkana dạṛ jo̱ṅpe?
9. Haere ! tinạk̕ ãṭ mayam jo̱ro̱yentaya.
10. Do kạmi calak̕me.


2. निम्नलिखित वाक्यों में उपयुक्त kukli sabad (प्रश्न शब्द) जोड़कर वाक्य बनाएं । 
Pạrtulko (उदाहरण):  No̱ṇḍe̱ kho̱n Dumkạ .......... sạṅgińa ?
No̱ṇḍe̱ kho̱n Dumkạ tinạk̕ sạṅgińa. 

1. Oṛak̕ ........m  calak̕a?
2. Gapa do̱ ......pe cekaea?
3. Jharkhaṇḍre sirạ montrti do̱e .......kana?
4. Sam Pangana do̱ ........ tahẽ̱kana?
5. Tilkạ Mạńjhi do̱ ......e janamlena?
6.Piprạ ato do̱ .......menak̕a?
7........... họṛ menak̕pea?
8. Rãci reajk̕ Rajdhani nũtum do̱ .......kana?
9.Sombar tayo̱m din do̱ ......din hijuk̕a?
10. Santali Dictionary do̱ .......o̱lakada?




 




                       


                                    


 

 

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